संस्कारों के बिना जीवन का मूल्य नहीं
विवाह संस्कार पवित्र संस्कार है, लेकिन आधुनिक समय में प्राणी संस्कारों से दूर भाग रहा है। जीव के बिना शरीर निरर्थक होता है, ऐसे ही संस्कारों के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं होता। उक्त उद्गार सांवेर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन शिव विवाह प्रसंग में भागवताचार्य पं. प्रदीप मिश्रा (सीहोर) ने कही।
उन्होंने शिव विवाह के बारे बताते हुए कहा कि, माता पार्वती ने बचपन से ही भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की और अनेक कष्ट सहे। देव ऋषि नारद के कहने पर माता सुनैना पिता हिमाचल ने देवी पार्वती का विवाह भगवान शिव के साथ करने को तैयार हो गए। निश्चित समय पर भगवान शिव हिमाचल के द्वार बारात लेकर आते हैं। भूत प्रेतों से सजी बारात को देखकर नगरवासी परेशान हो जाते हैं। माता सुनैना भी बेहोश हो जाती हैं। देवी पार्वती के अनुरोध पर भगवान शिव अपना मनमोहक रूप धारण करते हैं और सभी बारातियों को भी बहुत सुंदर बना देते हैं। तब सभी प्रसन्न होकर शिव का विवाह माता पार्वती के साथ करते हैं और यहीं से सनातन धर्म में विवाह की परंपरा प्रारंभ हो जाती है। उन्होंने बताया मां पार्वती ने मुनि नारद की आज्ञानुसार शिव प्राप्ति हेतु घोर तप किया। पश्चात ही वह भगवान शिव को प्राप्त कर पाई।
सोनकच्छ . भागवत कथा का श्रवण करते हुए श्रद्धालु।
आज वामन व नृसिंह अवतार प्रसंग
उन्होंने कहा एक जीवात्मा यदि ईश्वर को पाना चाहती है तो सबसे पहले उसे मुनि नारद के समान सतगुरु की आवश्यकता है। भागवत श्रवण के दौरान कथा का रसपान ही करो, अन्य रसपान करना भागवत का अपमान है। भागवत का अपमान करना ठाकुरजी का अपमान करना है। कथा पश्चात मुख्य यजमान एलएन माहेश्वरी ने सप|ीक भागवत कथा की आरती की। बाद प्रसादी का वितरण हुआ। कथा के प्रबंधक घनश्याम माहेश्वरी ने बताया कि, 18 अप्रैल को दोपहर 2 से 5 बजे तक वामन व नृसिंह अवतार का प्रसंग होगा। संध्या 8 बजे इंदौर की सखी भजन मंडली द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी।