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सत्संग उन्हीं लोगों के लिए है जिन्हें परमात्मा से मिलने की इच्छा है : पं. प्रदीप मिश्रा
भागवत कथा का एकाध चरित्र, एक वाक्य भी यदि मानव के जीवन मे उतर जाए तो जीवन सफल हो जाता है। आपका अपमान हुआ है, अपमान होता है और मन में यदि कुछ चाहा था वह नहीं हो पाया तो क्या आप मंदिर में जाकर भगवान से शिकायत करते हैं। जीवन में कष्ट तो आते-जाते हैं, संकट आने पर रोए नहीं बल्कि मुस्कराते रहिए। हम लोग आम तौर पर सुख में तो जीते हैं मगर दुख आने पर रोते हैं। सत्संग उन्हीं लोगों के लिए होता है जिनमें परमात्मा से मिलने की इच्छा होती है। जिनको परमात्मा से मिलने की छटपटाहट होती है वही सत्संग में शामिल हो पाते हैं। यह बात सांवेर में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन भागवताचार्य पं. प्रदीप मिश्रा सीहोर ने कही।
भक्त प्रहलाद के जन्म की कथा का वर्णन करते हुए बताया भक्त प्रहलाद राक्षस कुल में जन्म लेने के बाद भी भगवान श्रीनारायण के अनन्य भक्त हुए। उनके पिता हिरण्यकश्यप को श्रीनारायण का नाम लेने से और उनकी भक्ति करने से इतना क्रोध आया कि उन्होंने प्रहलाद को अनेक प्रकार से मारने की कोशिश की लेकिन प्रहलाद तो नारायण के भक्त थे तो उन्हें किसी भी प्रकार से कोई हानि नहीं हुई और वे हर बार बच गए। उनकी बुआ होलिका जिन्हें ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त था कि वह जलती अग्नि में चली जाए तो भी जीवित रहती है। प्रहलाद के पिता ने होलिका को बुलवाया ओर उनको कहा कि तुम प्रह्लाद को अपनी गोद मे बैठाकर जलती हुई अग्नि में बैठ जाओ तो प्रह्लाद जल कर भस्म हो जाएगा और तुम बचकर बाहर निकल जाओगी। पर प्रह्लाद तो श्री नारायण के भक्त थे, वे बच गए और होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गई। तभी से फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका का दहन किया जाता है।
कथा के बाद मुख्य यजमान एलएन माहेश्वरी ने सप|ीक भागवत कथा की आरती की। प्रसादी का वितरण हुआ। घनश्याम माहेश्वरी ने बताया 19 की दोपहर 2 से 5 बजे तक श्रीराम व कृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग होगा।
कथा में आज दोपहर 2 से 5 बजे के बीच श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग होगा
सांवेर में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ का पूजन करते श्रद्धालु।