अक्षय तृतीया : भक्तामर विधान व भगवान आदिनाथ का पूजन किया
सोनकच्छ. महिलाओं द्वारा पाठ किया गया। विभिन्न अनुष्ठान हुए।
भास्कर संवाददाता | सोनकच्छ
दिगंबर जैन मंदिर में सन्मति महिला मंडल द्वारा अक्षय तृतीया पर भक्तामर मंडल विधान का आयोजन किया। सुबह से भगवान आदिनाथ के कलशाभिषेक, शांतिधारा के बाद नित्यपूजन किया गया। भक्तामर मंडल विधान की रचना कर समाजजन ने मंदिर में पूजन अर्चन किया।
जैन धर्म में अक्षय तृतीया के महत्व
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ मुनि दीक्षा लेने के बाद छ: माह के उपवास की प्रतिज्ञा लेकर ध्यान मग्न हो गए थे। छह महीने बाद वे आहार के लिए निकले लेकिन कोई उन्हें आहार नहीं दे सका। उन्हें एक वर्ष आठ दिन तक निराहार रहना पड़ा। जब भगवान विहार करते हस्तिनापुर पधारे तब हस्तिनापुर नरेश सोमप्रभ के छोटे भाई श्रेयांश ने उन्हें अपने महल से देखा और उन्हें पूर्व भव में दिए आहार दान कि विधि का स्मरण हो आया और उन्होंने भगवान को नवधा पड़गाया और इक्षु रस (गन्ने का रस) का शुद्ध आहार दिया। वह पुण्य दिवस वैशाख शुक्ल तृतीया था। तब से ही जैन धर्म मे दान देने प्रकिया है। इसीलिए जैन धर्म के प्रत्येक घरों में आज गन्ने का रस पिया जाता है। जानकारी मीडिया प्रभारी रोमिल पाटनी ने दी।