नहर पर 11.61 करोड़ खर्च, ऐतिहासिक तालाब की हो रही अनदेखी
नांगलकाटा तालाब। नांगल अर्थात लकड़ी का हल और काटा मतलब हल से जोतकर बना हुआ तालाब। पूरे 25 एकड़ में ये तालाब था, लेकिन अब जमीन पर अवैध कब्जा से सिमट गया है। यह तालाब सोनुवा में है। इसका ऐतिहासिक महत्व है। इस तालाब पर सरकार की नजरें इनायत नहीं। स्थानीय लोग इस बात से दु:खी हैं किवंदति अनुसार सराक नामक जाति के द्वारा एक रात में हल से जोतकर बनाए गए तालाब के संरक्षण पर कोई ध्यान नहीं है। बहरहाल वर्तमान में इसी तालाब से होकर गुजरनेवाली एक नहर पर 11 करोड़ 61 लाख जलपथ प्रमंडल विभाग खर्च कर रही है। लेकिन तालाब के जीर्णोद्धार में खर्च नहीं हो रहा है। इस तालाब में जलक्रीड़ा जैसे पर्यटनीय संभावनाएं हैं। गोंडासाई चेक डेम से निकले नहर के जीर्णोद्धार कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि राजेश प्रधान ने अपने संबोधन के दौरान नागलकाटा तालाब के जीर्णोद्धार की मांग सांसद के समक्ष रखी। इस तालाब से सोनुआ, सोनापोस, गोंडासाई, मधुपुर, मसरीकुदर, बनुआ, महिषाबेड़ा, राजगांव, महुलडीहा, सरासपोस, लक्ष्मीपोस, पड़सा, बिनका, रेंगालबेड़ा, भालुरूंगी, शशिकला एवं तैरा को फायदा मिलेगा।
नांगलकाटा तालाब
मुख्य नहर के साथ ब्रांच का भी होगा जीर्णोद्धार
नहर के जीर्णोद्धार एवं पक्कीकरण योजना के अंन्तर्गत मुख्य नहर के साथ ही ब्रांच केनाल का भी जीर्णोद्धार एवं पक्कीकरण होगा। इसमें सोनुआ से शशिकला तक 5.5 किमी मुख्य नहर के अलावा तैरा की ओर 4 किमी रेंगालबेड़ा की ओर 2 किमी एवं राजगांव की ओर 1.5 किलोमीटर ब्रांच नहर है।
सराक समुदाय ने एक रात में खोद दिया था तालाब
16 वीं सदी के आसपास सराक जाति के लोग पोड़ाहाट राजतंत्र में निवास करते थे। यह जैन से संबंधित थे। मांस मदिरा से दूर रहते थे। पोड़ाहाट राजा के द्वारा किसी बात को लेकर सराक समुदाय के सरदार से मतभेद हो गया। इसके बाद सराक समुदाय के लोगों ने नाराज होकर गुस्से में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। जिसमें सराक समुदाय ने रात भर में हल से जोत कर नांगलकाटा तालाब के अलावे सैकड़ों तालाब पूरे पोड़ाहाट राजतंत्र में बना दिया था। इसके साथ ही पोड़ाहाट राज को परिवार सहित त्याग दिया।