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प्रेम को प्रेम की नजरों से देखो, क्यों इसमें नफरतों के जहर घोलता है...

3 वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर| शहर में रविवार शाम आयोजित मुशायरा ‘उसकी आवाज भी खुश्बू सी नजर आती है...’ में ख्यातनाम शायरों ने बेहतरीन शायरी से सैकड़ों श्रोताओं का मन मोह लिया। राष्ट्रीय कला मंदिर एवं वटवृक्ष संस्था की ओर से चौधरी रामजस कला मंदिर में हुए इस कार्यक्रम में दर्द, प्रेम, देशभक्ति जैसे कई विषयों पर शायरों ने कलाम व गजल पढ़ी। नौजवान डॉ. राहुल अग्रवाल ने प्यार पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि प्रेम को प्रेम की नजरों से देखो, क्यों इसमें नफरतों के जहर घोलता है, यह ना हिंदू की ना ही मुसलमान की यह तो इंसानियत की भाषा बोलता है। मुशायरे की शुरुआत अतिथियों ने सरस्वती मां के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर की। मुख्य अतिथि विधायक कामिनी जिंदल थी। अध्यक्षता डॉ. अरुण शहैरिया ताइर ने की। बन्नी बनारसिया ने बताया कि श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले में उभरती हुई कई नई प्रतिभाएं हैं। लेकिन उनकी शायद कोई विशेष पहचान नहीं है, हम लोगों की कोशिश है कि नवोदित शायरों को एक मंच दिया जाए जिसके माध्यम से वे अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर सकें। इससे पूर्व अतिथियों को फूल मालाएं पहनाकर सम्मान किया गया। अंत में सभी शायरों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय कला मंदिर एवं वटवृक्ष की ओर से चौधरी रामजस कला मंदिर में हुआ कार्यक्रम, हनुमानगढ़ से भी आए रचनाकार

दर्द, प्रेम, देशभक्ति जैसे विषयों पर कलाम व गजल पढ़ी, सियासत व धर्म के कुरूप गठजोड़ पर किए कटाक्ष

राजेंद्र सिंह सहू ने सियासत और धर्म कुरूप गठजोड़ पर कटाक्ष करते हुए कुछ पंक्तियां-बेबस, बेबस है सब तड़प रहे दिल के अरमां सब बेकार हुए पेश कर खूब वाहवाही बटोरी। प्रेम भटनेरी ने मिसरा पेश किया। उन्होंने जलते घर को देखने वालो उसका छप्पर आपका है आपके पीछे तेज हवा है आगे मुकद्दर है प्रस्तुत किया। युवा साहित्यकार निष्ठा गुप्ता ने कहा कि हुकूमत नहीं चला सकता कोई और मेरी जिंदगी पर, मेरे हर फैसले के हकदार मेरे पापा हुआ करते हैं। सुरेंद्र शर्मा सत्यम ने अगरचे दिलों में तन्हाई बहुत है, मगर बाहर तमाशाई बहुत है, लगा रहता है खतरा डूबने का, तेरी आखों के गहराई बहुत है...प्रस्तुत किया। युसुफ खान साहिल ने मां पर अपनी पंक्तियां पेश करते हुए कहा कि मुझको घर की जो हालत है वो मालूम है, इसलिए मैं मां से रोटी नहीं मांगता। अरुण शहैरिया ताइर ने चंद शेर सुनाए, सितम भरपूर है किस्मत के ये घाटे नहीं जाते, अना से जीते है तलवे भी तो चाटे नहीं जाते..., इसके बाद मेरी ख्वाइश तो होगी मुझ को तू हर बात मैं रखना, मगर मालिक मेरे मुझ को जरा औकात में रखना सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। मुशायरे में मंगल सिंह नाचीज, सत्यपाल जोइया, कुलविंद्र सिंह, दौलतराम अनपढ़, कुलभूषण कश्यप, डॉ. लीना परिहार ने भी अपने शेर पढ़कर खूब तालियां बटोरीं। निर्मल जैन, राजेंद्र सोनी, विजय गोयल, आरके गुप्ता, बनवारीलाल शर्मा, आकाश दीप स्वामी, डॉ. संदेश त्यागी, डॉ. कृष्ण कुमार आशु व सुरेश कनवाड़िया सहित काफी संख्या में श्रोता शामिल हुए।

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