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देविका बोलीं-बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों को मिले सजा-ए-मौत

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर

आतंकी अजमल कसाब को फांसी दिलवाने में अहम भूमिका निभाने वाली देश की बहादुर बेटी देविका रोटावन ने कठुआ और उन्नाव में हुई घटनाओं पर दुख जताते हुए कहा है कि ऐसे आरोपियों को मौत की सजा मिलनी चाहिए। देविका रविवार को मुंबई से श्रीगंगानगर आई थी। यहां उनका कई सामाजिक संस्थाओं ने कार्यक्रम कर सम्मान किया। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में सख्त होना चाहिए। कसाब जैसे आतंकवादियों से ज्यादा खतरा देश को ऐसे लोगों से है तो महिलाओं और बेटियों का सम्मान नहीं कर सकते। देविका ने कहा कि सरकार ऐसे लोगों को फांसी की सजा देने के लिए कानून बनाए क्योंकि जब नियम सख्त होंगे तभी बेटी बचाओ का नारा सार्थक हो सकेगा। आतंकी कसाब की गोलियां लगने के बाद गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी देविका और उसके परिवार ने हिम्मत नहीं छोड़ी। पाकिस्तान से धमकियां मिली और गवाही नहीं देने के लिए 25 करोड़ रुपए तक के प्रलोभन भी दिए गए लेकिन अगर इस बहादुर बेटी की न्यायालय में गवाही न हो पाती तो शायद देश का दुश्मन अभी भी दहशत फैला रहा होता। 26 नवंबर 2008 को मुंबई हमले की चश्मदीद देविका से भास्कर ने जाने उस वारदात के हर वो पहलू जो अब तक अनछुए थे।

आतंकवादी कसाब को फांसी तक पहुंचाने वाली बहादुर बेटी से भास्कर की विशेष बातचीत

मैने आतंकी कसाब को स्टेशन पर गोलियां चला हत्या करते देखा था, मरते बेकसूर लोगों की सिसकियां मुझसे कह रही थीं कि यह मानवता का हत्यारा है, इसे सजा दिलाना

26 नवंबर 2008 की बात है। मैं अपने पिता नटवरलाल और छोटे भाई के साथ बड़े भाई से मिलने पुणे जा रही थी। हम लोग स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। उसी समय कसाब और उसके साथी वहां आए और गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में मुझको भी गोलियां लगी लेकिन मैने आतंकी को गोलियां चलाते देख लिया था। अंधाधुंध गोलियों से मर रहे बेकसूर मासूम लोगों की सिसकियां मुझसे कह रही थी कि ये मानवता के हत्यारे हैं। ये जिंदा रहे तो इंसानियत मर जाएगी। जब होश आया तो मैं अस्पताल में थी। पुलिस ने मेरे बयान लिए और इसके बाद यह बात पूरे विश्व में फैल गई कि इस हमले में कोई चश्मदीद लड़की जिंदा है। मेरी जान को खतरा था इसलिए पुलिस सुरक्षा भी थी। मेरे पिता के पास पाकिस्तान से फोन आते थे और हमें रुपए देकर गवाही बदलने को धमकाया जाता था। हम नहीं माने तो पूरे परिवार को जान से मारने तक की धमकी दी गई। इसके बावजूद मैने कोर्ट में गवाही दी और आतंकी कसाब को जेल में मजिस्ट्रेट के सामने पहचाना। उसे फांसी हो गई तब जाकर सुकून मिला। वो दौर था कि लोग हमें रहने को किराए का मकान तक नहीं देते थे। जहां भी जाते, लोग कहते तुम्हारे कारण हमारे घर पर आतंकवादी आ सकते हैं। इस हादसे के बाद मेरे सगे भाई ने ही अपनी शादी में नहीं बुलाया। मैं राजस्थान सरकार से आग्रह करती हूं कि मुझे पढ़ने और रहने में मदद करें ताकि आईपीएस बनकर देश की सेवा कर सकूं। जैसा कि देविका ने भास्कर संवाददाता को बताया।

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