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बीईईओ की जगह डीईओ स्तर का अफसर लगाने की तैयारी, जिले में होगा डिप्टी डायरेक्टर का पद

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता, श्रीगंगानगर।

शिक्षकों की परेशानियों को दूर करने के लिए जल्द ही शिक्षा विभाग में नई व्यवस्थाएं करने की तैयारी है। विभाग ब्लाॅक स्तर पर ब्लाॅक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (बीईईओ) के पद को समाप्त करके यहां डीईओ लेवल के अधिकारी की नियुक्ति कर सकता है। वहीं जिले की जिम्मेदारी डीईओ के स्थान पर उपनिदेशक स्तर के अधिकारियों को सौंपी जाएगी। जानकारी के अनुसार पीईईओ (पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी) के पद के बाद विभाग में विभिन्न तरह की परेशानियां आने लगी थी। इसके बाद विभाग ने उच्च अधिकारियों को अपनी समस्या बताई थी, जिसके बाद विभाग में यह व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है। अगर उच्च स्तर पर इस प्रस्ताव को विभाग की मंजूरी मिली तो जल्दी ही यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। अब नई व्यवस्था से काम को लेकर गतिरोध समाप्त हो जाएगा।

आप भी जानिए, क्या है पीईईओ और क्यों बनाना पड़ा यह पद

पहले ब्लाॅक के हर स्कूल ब्लाॅक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (बीईईओ) के अधीन थे। यहां के शिक्षकों का वेतन, छुट्टियां और इस तरह के सभी काम बीईईओ कार्यालय से ही होते थे। बाद में सरकार ने पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (पीईईओ) का पद तैयार कर दिया। ग्राम पंचायत स्तर पर स्थित उच्च माध्यमिक स्कूल का प्रिंसीपल ही पीईईओ होता है और पंचायत के सभी स्कूलों की जिम्मेदारी अब पीईईओ के पास ही होती है। यानी शिक्षकों की छुट्टियां, वेतन जैसी समस्याएं अब पीईईओ स्तर पर ही होती हैं। यानी एक बीईईओ के पास लगभग 200 से 250 स्कूलों की देखरेख का काम होता था। पीईईओ पद बनने के बाद यह बंट गए और अब पीईईओ के अधीन सिर्फ ग्राम पंचायत में स्थित 8-10 स्कूल ही होते हैं। इससे बीईईओ का काम को खत्म हो गया, लेकिन उच्च माध्यमिक स्कूल के प्रिंसीपल (पीईईओ) का काम बढ़ गया।

बीईईआे पर असर...न शिक्षकों का वेतन बना सकते और न ही छुट्टी स्वीकृति का अधिकार : पीईईओ की पोस्ट बनने के बाद एक तरह से बीईईओ की भूमिका खत्म सी हो गई है। क्योंकि न तो इनके पास शिक्षकों की छुट्टियां स्वीकार करने का अधिकार बचा है और न ही इनके पास से शिक्षकों का वेतन बनता है। अब ब्लाक स्तर पर बीईईओ अगर शिक्षण व्यवस्था बनाने के लिए किसी शिक्षक की डेपुटेशन करते हैं तो पीईईओ उसे रिलीव ही नहीं करते हैं।

ये आ रही परेशानी...पीईईओ नहीं मानते हैं बीईईओ का आदेश, बढ़ा रहा गतिरोध

विभागीय सूत्रों की माने तो पीईईओ की पोस्ट बनने के बाद स्कूल के प्रिंसीपल बीईईओ की बात ही नहीं सुनते हैं। बीईईओ और पीईईओ दोनों ही प्रिंसीपल लेवल के पद हैं। दो साल के अनुभव के बाद प्रिंसीपल को बीईईओ के तौर पर नियुक्ति मिल जाती है और कई प्रिंसीपल ऐसे हैं जो 10-12 साल पहले ही प्रिंसीपल पदोन्नत हो चुके होते हैं। ऐसे में उनका कहना रहता है कि यह बीईईओ से ज्यादा वरिष्ठ हैं और बीईईओ उन्हें आदेश नहीं दे सकता है।

यह व्यवस्थाएं सरकार के स्तर पर लागू होती हैं। अभी हमसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं मांगी गई है। अगर सरकार इस बारे में कोई सूचना मांगेगी तो विभाग की ओर से सारी जानकारी भेज दी जाएगी। नूतन बाला, संयुक्त निदेशक, माध्यमिक शिक्षा

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