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परिजनों की दुत्कार पर जीवन खत्म करने चला था किशोर, चाइल्ड लाइन ने संभाला
श्रीगंगानगर। आपसी विवाद के चलते मां-बाप ने मासूम को छोड़ा तो वह आश्रम पहुंच गया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही ननिहाल पक्ष का दिल भर आया तो वह मासूम को अपने पास ले आए और पालन पोषण किया। जब वह बड़ा हो गया और उसकी पढ़ाई लिखाई का खर्च बढ़ गया तो ननिहाल ने भी रखने से इनकार कर दिया। इन हालात से क्षुब्ध होकर वह अपना जीवन खत्म करने की सोचकर चलते-चलते कोर्ट परिसर पहुंच गया। वहां से लोगों ने समझाइश कर चाइल्ड लाइन का रास्ता दिखाया। जहां उसे रात को सुरक्षित रखा गया और अब बुधवार को बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार आगामी कार्रवाई होगी। यह दास्तां है सेतिया फार्म निवासी कमलजीत(परिवर्तित नाम) की। कमलजीत ने बताया कि उसके पिता की शादी 1998 में श्याम नगर निवासी एक महिला से हुई। इसके दो साल बाद ही 25 जून 2000 को उसका जन्म हुआ। सब ठीक चलते-चलते अचानक माता-पिता में विवाद रहने लगा और उन्होंने तलाक ले लिया। माता-पिता अलग हुए तो पिता ने उसे अपने पास रखा और पालन-पोषण के लिए दूसरी शादी भी कर ली, लेकिन जब सौतेली मां के खुद की संतान हुई तो उसने सौतेलापन दिखाना शुरू कर दिया। सौतेली मां ने कमलजीत को रखने से इनकार कर दिया। पिता भी क्या करता सौतेली प|ी की जिद के चलते अपनी संतान को आश्रम में छोड़ आया। तभी कमलजीत के नाना-नानी को यह बात पता चली तो वह उसे अपने पास ले आए। स्कूल लगाया और पढ़ाई-लिखाई भी कराई, लेकिन अब जब वह दसवीं कक्षा में पहुंच गया तो उन्होंने भी उलाहने देना शुरू कर दिया। इस विवाद के चलते कमलजीत मंगलवार सुबह ही घर से निकल गया और भटकते हुए कोर्ट परिसर पहुंच गया। जहां अच्छे घर का दिखने के कारण लोगों ने पूछताछ की और उसे तपोवन चाइल्ड लाइन का रास्ता दिखाया। इसके बाद कमलजीत ने मंगलवार शाम को चाइल्ड लाइन पहुंच परियोजना समन्वयक महेश पेड़ीवाल से मुलाकात कर अाप-बीती बताई।