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निरंकारी संत समागम में गुरु महिमा का किया गुणगान

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता, श्रीगंगानगर।

गांव 17 जैड में निरंकारी संत समागम का आयोजन जोनल इंचार्ज महात्मा धर्मपाल टक्कर की अध्यक्षता में किया गया। इसमें अपने उद्बोधन में धर्मपाल टक्कर ने कहा कि सतगुरु संसार के लिए कल्याण के लिए आता है। सतगुरु समर्थ होता है, जो चाहे कर सकता है। इसकी महिमा को शब्दों में नहीं बोला जा सकता है। केवल ज्ञान लेने से कोई लाभ नहीं होता, जब तक दृष्टि और सोच ज्ञान के अनुरूप नहीं होती है। गुरमत जैसा कोई मत नहीं होता है। गुरमत गुलाब की तरह कांटों में रहना सिखाती है, गुरमत कमल की तरह कीचड़ में रहना सिखाती है। गुरमत हर हाल में एकरस रहना सिखाती है। गुरमत में जीने के लिए खुदी को मिटाना पड़ता है। सिर्फ वचनों से नहीं, कर्मों से जीवन जीकर दिखाना होता है। गुरमत गुरसिख की शान होती है। जहां अभिमान होता है, वहां निरंकार नहीं होता है। निरंकार प्रभु परम अस्तित्व परब्रह्म अकाट्य, अछेद्य, अभेद्य, अनन्त, अविनाशी, अजर, अमर, अडोल, अंचल, शांत एवं एकरस है। यह परम् अस्तित्व सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ एवं सर्वव्यापक है। इसका रंग, रूप, आकार कोई नहीं है, यह निराकार है। संत समागम में अनेक वक्ताओं ने गीतों एवं विचारों के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में निरंकारी श्रद्धालु उपस्थित थे।

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