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अस्पताल में 2 साल में लापरवाही से गई 8 जानें कमेटी सबमें बनी, जांच रिपोर्ट किसी की नहीं आई
भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर
जिला अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही बरतने के मामलों में पीड़िता के परिजन भले ही विरोध जताएं अथवा धरना लगाएं, प्रशासन की ओर से आज तक किसी एक जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं हुई। हद तो इस बात की भी है कि इन मामलों को जिला प्रशासन ने भी कभी गंभीरता से नहीं लिया। 8 अप्रैल की रात को अस्पताल स्टाफ और निजी एंबुलेंस चालक की लापरवाही से एक नवजात की मौत का मामला अभी ताजा ही है। इस मामले में भी अस्पताल प्रशासन ने घटना के चार दिन बीतने के बाद भी ना तो कमेटी गठित की ना ही किसी से जवाब तलब किया है। यह तो ताजा घटना है, इसी अस्पताल में बीते दो वर्षों में स्टाफ की लापरवाही से ही एक नहीं बल्कि सात नवजात और मरीजों की मौत हो चुकी। इसके बावजूद आज तक इन मामलों में कोई कठोर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है। यही कारण है कि स्टाफ इलाज के नाम पर कभी गंभीरता नहीं दिखाता। जिन परिवारों से नवजात, प्रसूताएं और मरीजों की माैत हो चुकी उनकी तकलीफ और दुख को समझने की संवेदनशीलता अस्पताल प्रशासन की कब की मर चुकी है।
केवल एक मामले में संविदाकर्मी को हटाया, डॉक्टरों में किसी पर कार्रवाई नहीं
1. घटना| प्रसूता मधु के नवजात को 8 अप्रैल को रेफर किया। जयपुर जाते निजी एंबुलेंस के सिलेंडर की गैस खत्म होने से नवजात की मौत।
कार्रवाई -चार दिन बाद भी किसी स्टाफ से जवाब तलब नहीं। जांच को कोई कमेटी तक गठित नहीं। सदर पुलिस ने एंबुलेंस सीज की।
5. घटना| 9 नवंबर 2016 को अबोहर निवासी कंचन के गर्भ में ही बच्चे की मौत बता बीकानेर रेफर किया। निजी हॉस्पिटल में डिलीवरी हुई।
कार्रवाई -पीएमओ ने डॉ. आस्था, डॉ. अनामिका और डॉ. शालू को नोटिस जारी दे चेतावनी दी। कार्रवाई कुछ नहीं की।
दुखी परिजन दुबारा आते नहीं, इसी का फायदा उठाता है अस्पताल प्रशासन
2. घटना| 20 मई 2017 को ऑक्सीजन नहीं मिलने पर अबोहर निवासी पूजा प|ी विक्की की मौत।
कार्रवाई -चार डॉ. प्रेम अरोड़ा, नर्सिंग अधीक्षक और हॉस्पिटल मैनेजर की कमेटी गठित। दो दिन में रिपोर्ट देने के आदेश, लेकिन कार्रवाई नहीं।
6. घटना| 24 सितंबर 2016 को सिरसा के संतावाली निवासी अवतार सिंह की प|ी मीना को वाइक्रिल नंबर-वन धागा नहीं होने पर रेफर किया।
कार्रवाई -उपनियंत्रक डॉ. प्रेम बजाज ने मौके पर पहुंचकर धागे की व्यवस्था कराई। इस लापरवाही पर भी कोई कार्रवाई नहीं।
अस्पताल में हुई हर मौत और स्टाफ की लापरवाही की घटना में परिजनों के हंगामे के बाद अस्पताल प्रशासन कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दे मौके पर तो परिजनों से हमदर्दी दिखाता है लेकिन बाद में कार्रवाई कुछ भी नहीं होती। अस्पताल प्रशासन संभवतया जानता है कि एक बार मामला शांत होने के बाद दोबारा कोई पूछने नहीं आता कि उनके मरीज की मौत के लिए किसे जिम्मेदार माना गया और क्या कार्रवाई हुई?
3. घटना| 20 मई 2017 को ही जगदंबा कॉलोनी निवासी सुशीला की गलत वार्ड में एडमिट करने के कारण हार्ट अटैक से मौत।
कार्रवाई -हार्ट मरीज को सामान्य वार्ड में किसने भेजा। परिजनों ने जांच की मांग नहीं की। कारणों का पता लगाने को कुछ भी नहीं किया।
7. घटना| 11 सितंबर 2016 को अबोहर निवासी अशोक कुमार की प|ी रीमा देवी के डिलीवरी के बाद नवजात की मौत।
कार्रवाई -पीएमओ ने डॉ. सोनिया छाबड़ा से जवाब मांगा। आरोपी डॉक्टर के बताए कारणों से संतुष्ट होकर कोई कार्रवाई नहीं की।
4. घटना| 11 अप्रैल 2017 को गांव 7 सी निवासी परमिंद्र सिंह की प|ी रणजीत कौर की बच्चेदानी फटने से मौत।
कार्रवाई -पीएमओ के अनुसार पीड़ित ने लिखित शिकायत नहीं की। इस कारण जांच कराना ही उचित नहीं समझा।
8. घटना| 24 फरवरी 2016 को गणेशगढ़ निवासी सरोज देवी की स्ट्रेचर नहीं होने पर मौत। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया।
कार्रवाई -पीएमओ की अध्यक्षता में डीसी, नर्सिंग अधीक्षक और मेडिसन वार्ड प्रभारी की कमेटी गठित। संविदा कर्मी को हटाया।