श्रीगंगानगर| जिले में अप्रैल माह में भारत पाक सीमा पर नग्गी क्षेत्र से हथियारों की तस्करी का खुलासा होने के बाद इलाके की सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है। तारबंदी भेदकर हथियारों की तस्करी और आरोपियों का पंजाब राज्य सीमा से भी सुरक्षित निकलकर तरणतारण तक पहुंचने से पुलिस, बीएसएफ और खूफिया एजेंसियों की निगरानी सवालों के घेरे में है। यह चिंता तब और भी बड़ी हो जाती है जब करीब ढाई माह पहले ही बोर्डर इलाके में ही पंजाब पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर विक्की गोंडर और प्रेम लाहोरिया का एनकाउंटर किया था। इस बार भी पंजाब के ही तस्करों ने न केवल अंतरराष्ट्रीय बोर्डर पर वारदात की बल्कि बीएसएफ की प्रथम निगरानी लाइन, राजस्थान पुलिस और राज्य सीमा पर नाकाबंदी तक को चुनौती देते हुए सुरक्षित निकल गए। हालांकि पुलिस और बीएसएफ का दावा है कि इस वारदात के आरोपी पकड़ लिए गए हैं लेकिन सवाल यह है कि 11 अप्रैल की रात को नग्गी बोर्डर पर हथियारों की तस्करी की वारदात के बाद तेज हवाएं चल जाती अथवा बरसात हो जाती तब सुबह बीएसएफ जवानों को तारबंदी पर पैरों के निशान भी नहीं मिलने थे। ऐसे में संभवत: इस वारदात का कभी भी पता ही नहीं चल पाता। आरोपियों के किसी नक्सलवादी गिरोह के भी जुड़े होने की आशंकाएं जताई जा रही है। इस तरह के गिरोह द्वारा ही हथियारों के साथ मादक पदार्थों की तस्करी की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने हथियार तस्करी के मामले में पंजाब के तरनतारण इलाका निवासी जसविंद्र सिंह उर्फ सोनू, जगराज सिंह उर्फ बिल्ला और रतनबीर सिंह उर्फ रतन को शनिवार को नग्गी स्थित तारबंदी पर घटनास्थल ले जाकर तस्दीक करवाई गई है।
भास्कर पड़ताल
पंजाब के कुख्यात अपराधी हमारे लिए शुरू से ही चुनौती बनते रहे हैं। चार माह में ही विक्की गोंडर गिरोह के छुपे होने लालगढ़ थाना क्षेत्र में स्वर्णकार पंकज सोनी से लूट व हत्या के मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गे अंकित भादू सहित अन्य आरोपियों का प्रवेश कर वारदात किए जाने की दो बड़ी घटनाओं के बाद तीसरी श्रीकरणपुर सेक्टर स्थित नग्गी भारत पाक सीमा से हथियार व मादक पदार्थों की सप्लाई का मामला सामने आना कोई छोटी वारदातें नहीं है।
पंजाब हमारे लिए शुरू से सिरदर्द, चौकियां बनाई, गश्त के निर्देश लेकिन सब प्रयास फेल
1.गोंडर एनकाउंटर के बाद आई थी स्पेशल ऑपरेशन यूनिट, दो सप्ताह बाद वापस लौटाई : विक्की गोंडर के 26 जनवरी की शाम को किए गए चक 3 सी छोटी की ढाणी में एनकाउंटर के बाद जिले में सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त और छापेमारी के लिए स्पेशल ऑपरेशन यूनिट की दो टुकड़ियों को बुलाया गया। दो सप्ताह तक पंजाब राज्य सीमा और पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के गावों में सर्च ऑपरेशन चलाया। इसके बाद टीम को वापस भेज दिया गया।
3.तारबंदी पर हाईमास्क लाइटें, गहन निगरानी फिर कैसे हो गई तस्करी: अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तारबंदी के पास बीएसएफ का कड़ा पहरा है। यहां हाईमास्क लाइटों के जरिए इतनी तेज रोशनी की जाती है कि छोटे जानवर भी चलते दिखाई दे जाएं। 11 अप्रैल को कृष्ण पक्ष की 10वीं तिथी थी। तस्कर हमेशा कृष्ण पक्ष की अमावस्या और इसके आस पास का समय चुनते हैं। इतनी कड़ी निगरानी में तस्करी की सफल वारदात संदेह उत्पन्न करती है।
पंजाब के कुख्यात अपराधी हमारे यहां शरण ले रहे वारदातें करके सुरक्षित भाग भी रहे
2.पंजाब राज्य सीमा के सभी 11 चोर रास्तों पर शुरू की चौकियां, अब वे भी बंद : हिंदूमलकोट इलाके में एनकाउंटर के बाद जिला पुलिस द्वारा पंजाब सीमा से आने वाले संदिग्ध वाहनों की जांच के लिए राज्य सीमा के सभी 11 चोर रास्तों पर चौकियां बनाई गई थी। कुछ दिन तो यहां सख्ती कर संदिग्ध वाहनों की सघन जांच की गई, लेकिन इसके बाद फिर वहीं ढाक के तीन पात हो गए। इन्हीं चोर रास्तों से नग्गी से तस्करी कर आरोपी पंजाब भाग गए।
4.जिले में 27 पुलिस थाने और 59 अधिकारियों के बाद भी तस्करी, चोरी और डकैती की हो रही वारदातें : जिले में 27 पुलिस थाने और 59 पुलिस अधिकारियों द्वारा सुरक्षा के तौर पर दिन रात गश्त की जा रही है। जिला मुख्यालय पर तो प्रत्येक थाना क्षेत्र में दो दो गश्ती गाड़ियां घूमती हैं। इसके बावजूद चोरियां, डकैती और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तस्करी तक की वारदातें हो रही हैं। आरोपी वारदात के बाद कई थाना क्षेत्रों से होकर बिना डर के भाग रहे हैं। यह गश्त व्यवस्था पर सवाल है।