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मनाने पहुंचे भाजपा जिलाध्यक्ष ने की पार्षदों की खिंचाई, बोले- टेंडर लगते हैं तो सभापति के साथ मिल जाते हो...नहीं तो पार्टी को कोसते हो

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

नगर परिषद में पार्षदों के इस्तीफे की राजनीति का वही अंत होता दिख रहा है, जो पहले होता आया है। अपनी ही पार्टी से खफा भाजपा के 11 पार्षद बैकफुट पर आते दिख रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष हरीसिंह कामरा व यूआईटी अध्यक्ष संजय महिपाल मंगलवार को पार्षदों से मिले। पार्षदों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ और बातों से ही रूठों को मना लिया गया। इस्तीफा देने वाले इन पार्षदों की 4 दिन तक पार्टी का कोई नेता सुध तक नहीं लेने आया। आखिर पांचवें दिन पार्टी जिलाध्यक्ष व यूआईटी अध्यक्ष मिलने पहुंचे। पार्षदों ने दोनों नेताओं के सामने खूब भड़ास निकाली और कहा कि हमारी कोई नहीं सुनता। वार्डों में विकास के काम रुके हुए हैं, लोग हमसे जवाब मांगते हैं। नेताओं ने पार्षदों से कहा कि अगर सभापति काम नहीं कराते हैं तो इसमें भाजपा का क्या दोष है? पार्षद भी कम नहीं...अविश्वास प्रस्ताव की बात आई तो ज्यादातर पीछे हट गए। तब पार्षदों को सभापति अच्छे लगते थे...अब उसी सभापति पर आरोप लगा रहे हो? आखिर संजय महिपाल ने पार्षदों से कहा कि वे वार्ड अनुसार कार्यों की सूची तैयार कर जिलाध्यक्ष को दें, जिस पर विचार किया जाएगा। इसके बाद पार्षदों ने एकबारगी धरना स्थगित कर दिया। बता दें सीएम दौरे के दौरान शहर में नालियों आदि के लिए 2 करोड़ रुपए मिले थे। इन रुपयों से कुछ वार्डों में टेंडर लगा दिए गए, बाकी रह गए। इसके चलते भाजपा के 11 पार्षदों ने पार्टी को लिखित इस्तीफा भेज दिया।

आरोपों की राजनीति में खुली पार्षदों की पोल, फिर बोले- गुरुवार तक इस्तीफे वापसी पर निर्णय लेंगे

नाराज पार्षदों को मनाने पहुंचे भाजपा नेताओं ने स्वार्थ की राजनीति करने वालों की क्लास भी ली। जिलाध्यक्ष ने कहा कि जब टेंडर की बात आती है तो पार्षदों की अपनी रणनीति होती है। जब पार्टी सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है तो पार्षद खुद-ब-खुद नया रास्ता अख्तियार कर लेते हैं। इस स्थिति में पार्टी पर आरोप लगाने से पहले पार्षदों को विचार करना चाहिए। यूं छोटी-छोटी बातों इस्तीफे की नौटंकी ठीक नहीं। कुछ मिलाकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक बात तो साफ हो गई कि ज्यादातर पार्षद स्वार्थ की राजनीति करते हैं।

3 पार्षदों का आरोप - यूआईटी अध्यक्ष भी करते हैं भेदभाव

पार्षद रामस्वरूप नायक, बालकृष्ण कुलचानिया, पार्षद पति सुभाष गहलोत सहित अन्य ने वार्ड में काम नहीं होने की बात रखी। साथ ही महिपाल पर ही काम में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। महिपाल ने कहा- 3-4 साल में नगरपरिषद द्वारा वार्डों में करवाए गए कार्यों की सूची उपलब्ध करवाओ। हम यूआईटी द्वारा करवाए कार्यों की सूची तैयार करते हैं। जिलाध्यक्ष को दोनों सूची उपलब्ध करवा देंगे। हकीकत सामने आ जाएगी।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने हाथ जोड़ पार्षदों को प्यार से समझाया भी, साथ ही साथ उन्हें आईना भी दिखाया।

पार्षद बोले- सभी वार्डों में लगाओ टेंडर, आयुक्त तो सुनतीं नहीं

पार्षदों ने जिलाध्यक्ष से कहा कि सीएम ने 2 करोड़ पूरे शहर के लिए दिए हैं, जिसे सभी वार्डों में खर्च किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आयुक्त उनकी सुनवाई तक नहीं करतीं। उन पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। इस पर जिलाध्यक्ष ने कहा कि वे आयुक्त से बात करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री से मिलकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा। यूआईटी चेयरमैन महिपाल ने कहा कि इस मुद्दे पर सभापति से बात की जा चुकी है।

चुनाव नजदीक, इसलिए भाजपा भी रख रही फूंक-फूंक पर कदम

इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। ऐसे में भाजपा के सामने कई बार दोहरी स्थिति आ जाती है। हालांकि भाजपा फूंक-फूंक पर कदम रख रही है। भाजपा का वोट बैंक वार्डों में कमजोर न पड़े, इसके लिए वह किसी भी नेता-कार्यकर्ता को नाराज नहीं करना चाहती। विधानसभा चुनाव में पार्षदों का भी अहम रोल रहता है। कई बार ऐसा होता है कि पार्षद सभापति के साथ मिल जाते हैं, जो कि निर्दलीय हैं।

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