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गुड़गांव की कंपनी बनाएगी मेडिकल कॉलेज, प्रथम व द्वितीय वर्ष की कक्षाओं का भवन 6 माह में बनाने का दावा
भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर
जिला अस्पताल परिसर में प्रस्तावित बीडी अग्रवाल राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के भवन निर्माण की जिम्मेदारी गुड़गांव की शोभा बिल्डर्स कंपनी को दी गई है। कंपनी ने एमबीबीएस प्रथम और द्वित्तीय वर्ष की कक्षाओं के लिए आवश्यक भवन को 6 माह में ही तैयार करने का दावा किया है। इस संबंध में दानदाता बीडी अग्रवाल ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में हुई निर्माण समिति की बैठक में जानकारी दी। दानदाता ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से भवन निर्माण के लिए दोबारा करीब 22 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी जमा करवाकर प्रशासन को रिपोर्ट सौंप दी है। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर ज्ञानाराम ने करते हुए दानदाता से कहा कि सरकार की ओर से प्राप्त हुए पत्र में महाविद्यालय भवन के द्वित्तीय चरण के लिए अनुमानित लागत 250 करोड़ रुपए बताई है। दानदाता ने कहा कि यह लागत द्वित्तीय चरण की नहीं बल्कि संपूर्ण भवन निर्माण की हो सकती है। इस पर कलेक्टर ने सरकार को वापस पत्र लिखकर लागत स्पष्ट कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने दानदाता से कहा कि आप निर्माण शुरू करने के लिए साइट पर कच्चा माल डलवाना शुरू करें ताकि लोगों को विश्वास हो। सरकार ने भी हमसे कहा है कि निर्माण शुरू करने में देरी क्यों हो रही है जबकि 20 मार्च को जयपुर में हुई बैठक में एमओयू अवधी बढ़ाने के एक माह में निर्माण शुरू करने का आश्वासन दिया था। दानदाता ने कहा कि एमसीआई की ओर से स्ट्रक्चर डिजाइन परिवर्तन कर दिया इसलिए देरी हो रही है। इस दौरान एडीएम प्रशासन नखतदान बारहठ, सीएमएचओ डॉ नरेश बंसल, पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन सुमन मनोचा व दानदाता के सहयोगी उदयपाल झाझड़िया ने भाग लिया।
अभी भी तीन बाधाएं, कलेक्टर ने कहा - हम तीन दिन में करवा देंगे स्ट्रक्चर डिजाइन पास, दानदाता ने कहा,24 मई को सौंप देंगे मसौदा
1. स्ट्रक्चर डिजाइन बना नहीं, इसके बिना कालेज का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा
दानदाता : दानदाता ने कहा कि वे 24 मई तक भवन के नए स्ट्रक्चर डिजाइन को जिला प्रशासन को सौंप देंगे। इसको बनाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से 9 मई को ही पत्र प्राप्त हुआ है। हालांकि हमारी ओर से काम लगातार जारी है।
देरी से लागत 40 करोड़ बढ़ी, तीन साल पहले बनकर तैयार होना था भवन, 300 छात्र कर रहे होते डॉक्टरी की पढ़ाई: भवन निर्माण में आ रही अटकलों के कारण निर्माण की लागत करीब 40 करोड़ रुपए बढ़ गई है। 2013 में एमसीआई द्वारा स्वीकृत डिजाइन को तैयार करने में लागत 210 करोड़ रुपए ही थी। अब यह बढ़कर 250 करोड़ हो गई है। अगर समय पर भवन निर्माण शुरू हो गया होता तो अब एमबीबीएस की कक्षाएं चल रही होती।
प्रशासन : कलेक्टर ने दानदाता से कहा कि आपकी ओर से स्ट्रक्चर डिजाइन पीडब्ल्यूडी को सौंपने में देरी हो रही है। 24 मई को अगर स्ट्रक्चर डिजाइन हमें मिल गया तो हम तीन दिन में इसे पीडब्ल्यूडी मुख्यालय भेजकर स्वीकृत करवाकर ले आएंगे।
2. मेडिकल कॉलेज भवन में फायर फाइटिंग सिस्टम प्रमाण पत्र अब तक जारी नहीं हुआ
दानदाता : भवन में लगाया जाने वाला फायर फाइटिंग सिस्टम डिजाइन भी तक स्वीकृत नहीं हुआ है। हमने दमकल विभाग को पत्र लिख रखा है। जयपुर से स्वीकृति आनी है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
प्रशासन : कलेक्टर ने दानदाता को भरोसा दिलाया कि यह प्रमाण पत्र भी आपको जल्दी ही स्वीकृत करवाकर मिल जाएगा। इस संबंध में अगर दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी हो गई है तो नियमानुसार काम हो जाएगा।
10 लाख लगे थे पहले स्ट्रक्चर डिजाइन पास कराने में, हाईकोर्ट से मैं ही स्वीकृति लेकर आया : दानदाता ने बताया कि 2013 में स्वीकृत किए गए एमसीआई के स्ट्रक्चर डिजाइन को पीडब्ल्यूडी से स्वीकृत कराने का करीब 10 लाख रुपए शुल्क चुकाया था। तभी आईएमए भवन निर्माण रुकवाने को हाईकोर्ट चली गई। वहां हमने आईएमए को नई जगह पर नया भवन बनाकर देने का लिखित समझौता कर निर्माण बाधा दूर की। अभी भी स्ट्रक्चर डिजाइन पास कराने को शुल्क देंगे। निर्माण हर हाल में होगा। किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।
3. नगर विकास न्यास की ओर से भी अभी तक कॉलेज का नक्शा स्वीकृत नहीं किया गया
दानदाता : दानदाता ने बैठक में बताया कि यूआईटी की ओर से अभी तक महाविद्यालय भवन का नक्शा प्लान स्वीकृत नहीं किया गया है। इसके लिए आवेदन किए काफी समय हो गया है। नक्शा बीकानेर से एसटीपी पास करेंगे।
प्रशासन : यूआईटी सचिव ने कलेक्टर को फोन पर बताया कि दानदाता के आवेदन में कमियां थी। पूर्ति के लिए वापस लौटा दिया था। कलेक्टर ने दानदाता से दोबारा आवेदन करने को कहा। यूआईटी इसे अपने स्तर पर तीन दिन में एसटीपी से स्वीकृत करवाएगी।