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205 साल बाद शनि देव जयंती पर बना विशेष योग, श्री शिंगणापुर स्वरूप धाम में 5100 दीपों से हुई महाआरती

3 वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर| ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर कृतिका नक्षत्र में सूर्यदेव व छाया के पुत्र भगवान शनि का जन्म हुआ था। इस बार 205 साल बाद शनि और मंगल के साथ रहने का संयोग बना और मंगलवार को शनि जयंती आई। यह योग सभी श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत शुभकारी फल देने वाले थे। ऐसे में मंगलवार को शहर के विभिन्न शनि मंदिरों में सुबह से ही दंडनायक भगवान शनि को मनाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। शनिदेव महाराज के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने शनि देव के सामने तेल के दीये जलाए। उनकी प्रतिमा पर सरसों तेल से अभिषेक किया और अपने परिवार के लिए मंगल कामना की। हनुमानगढ़ रोड स्थित श्री शिंगणापुर शनि मंदिर के चार दिवसीय 10वें वार्षिकोत्सव का मंगलवार को समापन हुआ। इसमें 71 घंटों से चल रहे रहे अखंड शनि नाम संकीर्तन के पाठ का भोग डाला गया। इसके बाद 5100 ज्योतों से शनि महाराज की आरती की गई। पंडित प्रदीप भार्गव ने बताया कि अखंड रूप से शनि महाराज का भंडारा चलता रहा, इसमें सैकड़ों लोगों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

शिवालय के नजदीक स्थित शनि मंदिर में मंगलवार को दिनभर धार्मिक आयोजन होते रहे। सुबह वैदिक मंत्रों के साथ हवन किया गया, इसके बाद भजन-कीर्तन होते रहे। शाम को शनि महाराज की विशेष महाआरती कर प्रसाद वितरण किया गया। वहीं, पुरानी आबादी स्थित शनि मंदिर में भी सारा दिन दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने शनि देव के दर्शन कर साढ़े साती से मुक्ति के लिए प्रार्थना की।

बीरबल चौक स्थित बाल रूप शनि मंदिर में भी मंगलवार को शनि जयंती धूमधाम से मनाई गई। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर के बाहर बैठे याचकों को दान देकर पुण्य कमाया। कई श्रद्धालुओं ने मंदिर के बाहर भंडारा भी लगाया। शाम को शनि महाराज की भव्य आरती हुई और प्रसाद वितरण किया गया।

दंड नायक शनि देव को मनाने शहर के मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु

प्रतिमा का सरसों तेल से किया अभिषेक, भक्ताें को बांटे शनि छल्ले

श्रीगंगानगर. शनि जयंती पर श्री शिंगणापुर धाम शनि मंदिर में महाआरती करते श्रद्धालु।

श्री शिंगणापुर शनि मंदिर में हजारों श्रद्धालु पहुंचे। सभी भगवान को प्रसन्न करने के लिए सरसो के तेल के दीप जला रहे थे। ऐसे में मंदिर के बाहर दीपों की कतार लग गई। शाम को जब सूरज ढला तो ऐसे लग रहा था मानो दीपों से ही सारा मंदिर रोशन हो गया है। आरती के बाद श्रद्धालुओं को पंचमेवे का प्रसाद वितरित किया गया। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को अभिमंत्रित शनि छल्लों का वितरण किया गया।

और इधर, रात पौने बारह बजे केक काट मनाया शनिदेव का जन्मदिन

श्रीगंगानगर. नई धानमंडी स्थित सिद्धश्री शनिदेव मंदिर में रात पौने बारह बजे जागरण के बीच भक्तों ने केक काटकर न्याय के देवता भगवान शनिदेव का जन्मदिन मनाया। नियत समय पर जैसे ही मंदिर में महिलाओं ने थाली बजाई, मंदिर परिसर भगवान सूर्य व मां छाया के पुत्र शनिदेव के जयकारों से गूंज उठा। इसके साथ ही मौजूद भक्तों ने बड़ा केक काटा और भगवान को भोग लगाकर श्रद्धालुओं को बांटा। इससे पहले आतिशबाजी भी हुई। इसके साथ ही बजरंगबली और भगवान श्रीकृष्ण के भजनों के दौरान सचेतन झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रही। श्रद्धालुओं में श्रद्धा इस कदर थी कि खराब मौसम के चलते आंधी में भी सब डटे रहे और शनिदेव का गुणगान किया व सुना।

पुरानी आबादी शनि मंदिर में हवन करते श्रद्धालु।

श्रीगंगानगर. धानमडी के निकट स्थित शनि मंदिर में केक काटते श्रद्वालु।

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