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10 साल की मासूम से किया था दुष्कर्म, 5 साल बाद दोषी को 10 साल कैद, 15 हजार जुर्माना

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर

सरकारी स्कूल की तीसरी क्लास में पढ़ रही 10 साल की मासूम बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म के दोषी को 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। यह निर्णय पोक्सो मामलों की विशेष अदालत की न्यायाधीश संदीपकौर ने शनिवार को सुनाया। आराेपी पर 15 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। आरोपी वारदात के बाद गिरफ्तारी से अब तक जेल में ही था। अदालत ने आरोपी की जेल में बिताई अवधि को मूल सजा में समायोजित करने के आदेश भी दिए हैं।

केसरीसिंहपुर थाना क्षेत्र का मामला, पोक्सो मामलों की विशेष अदालत का फैसला

अदालत के विशिष्ट लोक अभियोजक बनवारीलाल कड़ेला ने बताया कि केसरीसिंहपुर पुलिस ने 13 अगस्त 2013 को मामला दर्ज किया था। पीड़िता के बुजुर्ग दादा ने थाने में उपस्थित हो बताया कि रात को वह और उसकी प|ी अपनी 10 साल की पोती के साथ घर में सो रहे थे। रात करीब तीन बजे परिवादी की प|ी को जाग हुई तब देखा कि उनकी पोती चारपाई पर नहीं है। पुलिस ने इस संबंध में बालिका के अपहरण के आरोप में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तलाश शुरू की। पूछ पड़ताल के आधार पर आरोपी 20 एफ निवासी आरोपी रामस्वरूप नायक पुत्र जगमालाराम के कब्जे से डबवाली से बालिका को बरामद किया। आरोपी को राउंडअप कर थाने लाया गया। बालिका के स्वास्थ्य परीक्षण और मजिस्ट्रेट बयान के आधार पर आरोपी पर अपहरण, दुष्कर्म और पोक्सो की धारा 3 व 4 में मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया। अदालत ने आरोप साबित होने पर शनिवार को आरोपी को आईपीसी की धारा 376 (2) (आई) व पोक्सो एक्ट की धारा 3 व 4 में 10 साल कठोर कारावास की सजा व पांच हजार रुपए जुर्माना लगाया है। आईपीसी की धारा 366 में भी 10 साल कठोर कारावास और 5 हजार जुर्माना तथा आईपीसी की धारा 363 में 7 साल कठोर कारावास व 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। आराेपी गिरफ्तारी के बाद से जेल में था। इस अवधि को उसकी मूल सजा में समायोजित करने के भी कोर्ट ने आदेश दिए हैं।

मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता के मजिस्ट्रेट बयान बने दोष सिद्धि के मजबूत आधार

विशिष्ट लोेक अभियोजक बनवारीलाल कड़ेला ने बताया कि मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह पेश किए गए। इसके अलावा आरोपी की अभिरक्षा से बरामद की गई बालिका के मजिस्ट्रेट बयान लेखबद्ध कराए गए। उसमें भी बालिका ने आरोपी पर बहला फुसलाकर अपहरण करने, डबवाली में जबरन बंधक बनाकर रखने और दुष्कर्म करने के आरोप दोहराए थे। पुलिस की ओर से पीड़ित बालिका के करवाए गए स्वास्थ्य परीक्षण में भी दुष्कर्म की पुष्टि की गई। इसके अलावा एफएसएल रिपोर्ट में भी दुष्कर्म की पुष्टि की गई। इस आधार पर आरोपी के अदालत में अपहरण नहीं करने और दुष्कर्म नहीं करने के दिए गए बयानों को खारिज कर दिया गया।

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