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महिपाल लाेकायुक्त के समक्ष पेश; बिना भू-रूपांतरण निजी अस्पतालों पर कार्रवाई के िलए मांगे 3 माह, सुनवाई 5 जून को

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

काम में कोताही बरतने के मामले में सोमवार को फिर लोकायुक्त जयपुर में सुनवाई हुई। जहां नगर परिषद व यूआईटी में गत वर्षों में तैनात रहे आरएएस अफसरों से फिर पूछा गया कि बिना भू-रूपांतरण के संचालित हो रहे निजी अस्पतालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यूआईटी की तरफ से अध्यक्ष संजय महिपाल व सचिव कैलाशचंद शर्मा उपस्थित हुए। जहां महिपाल ने लोकायुक्त को बताया कि मामला काफी पुराना है। दूसरा अधिकतर अस्पताल घरों में ही बनाए गए है। सरकार को लैंड यूज चेंज के लिए प्रार्थना पत्र भेजा गया है। वहां से जैसे ही आदेश मिलेंगे न्यास की ओर से पालना कर दी जाएगी। महिपाल ने यह भी बताया कि यह जनहित से जुड़ा मामला है। निजी अस्पतालों में शहर से ही नहीं बल्कि पंजाब व हरियाणा तक से लोग इलाज कराने आते हैं। ऐसे में एक साथ अस्पतालों को सीज करना संभव नहीं है। महिपाल ने लोकायुक्त से तीन माह का समय और मांगा है। सुनवाई में नगरपरिषद की तरफ से सभापति व आयुक्त दोनों ही नहीं पहुंचे। इस पर लोकायुक्त ने अगली सुनवाई 5 जून तय की है।

वार्ड 29 पार्षद पवन गौड़ ने बिना भू-रूपांतरण निजी अस्पताल चलाने को लेकर पहली बार 2016 में शिकायत की थी। गौड़ ने लोकायुक्त को अवगत कराया कि शहर में 20 वर्षों से हर गली, मुख्य सड़कों पर निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। परिषद की ओर से पूर्व में किए गए सर्वे में ज्यादातर अस्पताल अनियमितताओं के तहत संचालित पाए गए। कई बार लिखित शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। निकायों ने अपना बचाव करने के लिए सिर्फ नोटिस दिए। नगरपरिषद बोर्ड ने भी इस संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। गौड़ ने बताया कि उन्हें लोकायुक्त पर पूरा भरोसा है, जल्द ही न्याय भी मिलेगा।

शहर के हालात ये: 200 से ज्यादा संस्थान बिना कन्वर्जन के, कार्रवाई करें तो 50 करोड़ राजस्व की होगी आय

श्रीगंगानगर शहर में अस्पताल, कोचिंग संस्थान, पीजी, मैरिज पैलेस आदि को मिलाकर करीब 200 से ज्यादा संस्थान ऐसे हैं, जिनमें से किसी ने भी भू-उपयोग परिवर्तन नहीं करवा रखा है। बताया जा रहा है कि सभी संस्थानों से परिषद व न्यास की ओर से वसूली की जाए तो सरकारी खाते में 50 करोड़ से अधिक रुपए की आय होगी।

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