श्रीगंगानगर| नग्गी क्षेत्र में 18 किलो हेरोइन की तस्करी करने आए तरनतारण जिले के राजोके निवासी जगराज उर्फ बिल्ला जटसिख की करीब 7 एकड़ जमीन राजोके गांव की रोही में पाकिस्तान-भारत तारबंदी के पास तक है। इस कारण वह खेत में काम करते हुए ही मौका पाकर तारबंदी पार के पाकिस्तानियों से बातचीत कर लेता था। उसके खिलाफ इससे पहले हेरोइन तस्करी का कोई मामला दर्ज नहीं है। लेकिन वह हेरोइन तस्करी की अन्य वारदातों में भी शामिल रहा है। आरोपी बिल्ला की पारिवारिक आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। वह खेती से ही परिवार की आजीविका चलाता है और उसके स्थानीय नेताओं के साथ संबंंध भी बताए जा रहे हैं। आरोपी हेरोइन तस्करी के मामलों में पहले भी शामिल रहा है लेकिन पहली बार पकड़ में गया है। उसकी आर्थिक स्थिति ही बताती है कि वह 90 करोड़ रुपए मूल्य की हेरोइन खरीदने की स्थिति में नहीं है। उसके पीछे किसी न किसी बड़े तस्कर का हाथ है। श्रीगंगानगर पुलिस का कहना है कि वह कोरियर है जबकि असली आरोपी दो और हैं जो अभी पकड़े नहीं जा सके हैं। इस बात की सच्चाई तब सामने आएगी जब गिरफ्तार किए गए आरोपियों के बताए मुख्य सरगना श्रीकरणपुर पुलिस की हिरासत में होंगे।
रतनबीर को 2008 में पकड़ा था, जमानत पर जेल से बाहर आया और तस्करी करने लगा
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार पकड़े गए रतनबीरसिंह उर्फ रतनु के पास रतोके गांव की रोही में 6 एकड़ जमीन है। वह अपने माता-पिता के साथ रहता है। उसका छोटा भाई हाल ही सेना में नौकरी लगा है। रतनबीर सिंह को इससे पहले राजोके निवासी स्वर्णसिंह पुत्र मेजरसिंह जटसिख के साथ दो किलो हेरोइन तस्करी के आरोप में 30 सितंबर 2008 को गिरफ्तार किया गया था। रतनबीर की जमानत हो गई जबकि स्वर्णसिंह अभी भी जेल में ही है।
रतनबीर ने नग्गी की 18 पैकेट हेरोइन तस्करी की घटना में गाड़ी तरनतारण से यहां और वारदात को अंजाम देने के बाद वापस सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई थी।
जगराज उर्फ बिल्ला ने रतनबीर को गाड़ी चलाने के बदले दिए थे पांच लाख रुपए
सूत्रों के अनुसार रतनबीर गाड़ी चलाने का माहिर है। उसको इससे पहले जगराज उर्फ बिल्ला ने एक अन्य तस्करी के लिए गाड़ी चलाने मात्र के एक लाख रुपए दिए थे। नग्गी से 18 किलो हेरोइन की तस्करी की वारदात को अंजाम देने के लिए उसको पांच लाख रुपए दिए गए थे। वह आर्थिक रूप से कमजोर है और अपनी 6 एकड़ जमीन पर सब्जियां उगाकर जीवनयापन करता है। सूत्रों से पता चला है कि इससे पहले उसने आढ़तियों से कर्ज भी ले रखा था। आरोपी तरनतारण से श्रीगंगानगर तक के सभी चोर रास्तों का जानकार है। वह गाड़ी तेज और सुरक्षित चलाता है और नाकाबंदी पर पुलिस को देखकर घबराता नहीं इसलिए उस पर संदेह नहीं होता।