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जिला अस्पताल में पीएमओ, डीसी और लेखाधिकारी पर 26 लाख के राजकोष को हानि का आरोप, एसीबी में पीई दर्ज

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

जिला अस्पताल के अधिकारियों पर 26 लाख रुपए के राजकोष को नुकसान और पद के दुरुपयोग सहित गबन के आरोप लगे हैं। इस संबंध में मुख्यालय के आदेश पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो श्रीगंगानगर चौकी ने प्राथमिक जांच शुरू की है। एसीबी ने जिला अस्पताल से शिकायतों से संबंधित सारा रिकॉर्ड मंगवा लिया है। हालांकि शिकायतकर्ता जसवंतकुमार के अनुसार लगाए गए आरोपों की पहले ही विभागीय जांच हो चुकी है। इसमें पीएमओ, डीसी और लेखाधिकारी को दोषी माना गया है, लेकिन इसके बावजूद अभी तक विभाग की ओर से पदस्थ इन अधिकारियों के खिलाफ न तो पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया गया है, न ही गबन की राशि की वसूली संबंधी कार्रवाई ही आरंभ की गई है। शिकायतकर्ता ने पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना, उप नियंत्रक डॉ. प्रेम बजाज और तत्कालीन लेखाधिकारी रामगोपाल स्वामी पर गबन के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने एसीबी मुख्यालय पर भेजे परिवाद में सभी दस्तावेज भी साथ भेजे थे, जिनकी जांच से प्रथम दृष्टया आरोप सत्य प्रतीत होते हैं। ये दस्तावेज जिला अस्पताल से ही सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त किए गए थे।

मरीजों की पर्ची काटने का ठेका

28900 रुपए न्यूनतम बिड वाले को न देकर 48240 रुपए वाले को दिया ठेका

शिकायतकर्ता ने एसीबी को भेजे परिवाद में बताया कि जिला अस्पताल में आरएमआरएस के तहत अगस्त 2016 में पर्ची काउंटर पर पर्चियां काटने की निविदाएं दी गई। इसमें न्यूनतम बोलीदाता पुरानी आबादी के रायसिंह शर्मा ने 28900 रुपए मासिक का रेट भरा। अस्पताल प्रशासन ने यह ठेका प्रेमनगर निवासी अशोक खुराना को 48240 रुपए मासिक के रेट पर आवंटित कर दिया। इस तरह एक साल के लिए उक्त फर्म को 6 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

चद्दर धुलाई

2 लाख की चपत, पांच रुपए प्रति चद्दर वाले को ठेका न दे 9.65 रुपए रेट वाले को दिया

शिकायतकर्ता द्वारा एसीबी को उपलब्ध करवाए गए दस्तावेजों के अनुसार जिला अस्पताल में चद्दर धुलाई का 2016 में दिया गया। इसमें 6 फर्मों ने निविदाएं भरी। न्यूनतम दरें प्रति चद्दर 5 रुपए थी जो कि नागौरी कॉलोनी निवासी शम्मीकुमार की फर्म की थी। अस्पताल प्रशासन ने अनिता खुराना प|ी अशोक खुराना निवासी प्रेमनगर को ही 9.65 रुपए प्रति चद्दर की धुलाई की दर से ठेका आवंटित करते हुए कार्यादेश जारी किया।

आरएमआरएस के कलेक्टर अध्यक्ष, उनसे तो अनुमति ही नहीं ली

शिकायतकर्ता के अनुसार आरएमआरएस के कलेक्टर अध्यक्ष होते हैं। आरएमआरएस की 2015 से 2017 तक नियमित मासिक बैठकें तक नहीं करवाई गईं। ठेका नीलामी संबंधी समयावधि बढ़ाने के लिए वाजिब कारण बताते हुए कलेक्टर से अनुमति आवश्यक है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने कलेक्टर को इस बारे में न तो अवगत करवाया न ही बैठक में एजेंडा शामिल किया गया। इस तरह से इस सारे मामले से आरएमआरएस के अध्यक्ष को ही अनभिज्ञ रखा गया।

आरएमआरएस ने ही हर तरह के काम को ठेके पर दिया

साइकिल स्टैंड

एक साल के लिए दिया था, लेकिन साढ़े तीन साल तक बढ़ाया, 6 लाख रुपए का नुकसान

इसी तरह अस्पताल प्रशासन ने साइकिल स्टैंड के ठेके को नवंबर 2015 में एक साल के लिए प्रेमनगर निवासी अशोक खुराना को ही दिया। एक साल पूरा होने के बाद इसी फर्म को आगे ढाई साल तक वसूली करने दी गई। इसमें आरएमआरएस अध्यक्ष को सूचना तक नहीं दी गई और तथ्य छुपाए रखे गए। इस तरह से उक्त फर्म को साइकिल स्टैंड के पार्किंग ठेके के बदले 6 लाख रुपए से अधिक का राजकोष को नुकसान पहुंचाते हुए उक्त फर्म को लाभ दिया गया। मार्च 2018 में दोबारा नए टेंडर किए गए।

विभागीय जांच को 16 माह का ही रिकॉर्ड उपलब्ध करवाया, 8 सालों का रिकॉर्ड गायब कर दिया

शिकायतकर्ता ने बताया कि आरएमआरएस में गबन और जिला अस्पताल अधिकारियों द्वारा भारी वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों की स्वास्थ्य विभाग ने आंतरिक जांच करवाई। बीकानेर सहायक निदेशक कार्यालय से आई जांच टीम को अस्पताल प्रशासन ने केवल 16 माह का ही रिकॉर्ड उपलब्ध करवाया जबकि करीब 8 साल का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। इस जांच में विभागीय दल ने पीएमओ, डीसी और लेखाधिकारी को करीब साढ़े 26 लाख के गबन का दोषी माना।

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