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गंगनहर में पहुंचा केमिकलयुक्त काला पानी, साथ में आ रहे मछली, सांप व पशुओं के शव, भास्कर के चेताने पर प्रशासन ने अब लगाई इस्तेमाल पर रोक

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

चार दिन पूर्व ब्यास नदी में छोड़ा गया शुगर फैक्ट्री का लाखों लीटर रसायन युक्त शीरा रविवार को पानी के साथ गंगनहर में भी पहुंच गया। सुबह 5 बजे खखां, 10 बजे शिवपुर और दोपहर बाद यह पानी जब कालूवाला हैड पर पहुंचा तो अपने साथ असंख्य मृत मछलियां, सांप, गीदड़ और पशुओं के शव लेकर पहुंचा। तीन-चार दिन पहले मरे इन जीवों के कारण पानी अब सड़ांध मारने लगा है। ब्यास नदी में डाले गए शीरे से पानी में ऑक्सीजन खत्म होने से बड़ी संख्या में जलीय जीवों की मौत हुई थी। गंगनहर में पहुंचे इस जहरीले पानी का दुष्प्रभाव श्रीगंगानगर जिले के खेतों एवं वनों में विचरण कर रहे हरिण, नील गाय, सहित अन्य प्राणियों पर पड़ सकता है।

दोपहर बाद जब यह पानी साधुवाली पुल से गुजरा तो बड़ी संख्या में लोगों ने बदबू के कारण अपने मुंह पर कपड़ा रखकर इस गंदे पानी को देखा। कालूवाला हैड पर भास्कर रिपोर्टर ने असंख्य छोटी-छोटी मछलियों को छटपटाते और मरे हुए जलीय जीव देखे। दूर-दूर तक इस पानी की बदबू आ रही है। पानी के अंदर बीच-बीच में लाल रंग के पानी की गोलाकार लहर और उसके चारों ओर चॉकलेटी कलर का पानी बह रहा था। इस पानी में दोपहर में बच्चे नहाते हैं, जिनके बीमार पड़ने का खतरा है। रीको एरिया के आसपास की ढाणियों एवं चकों में नहर से पानी उठाकर टैंकरों के जरिए पहुंचाया जा रहा है। यह किसी महामारी का संकेत दे रहा है।

भास्कर अपील; सीधा पानी न खुद पीएं न मवेशियों को पिलाएं, सावधानी बरतें

पेयजल के लिए इस्तेमाल करने से किया है मना|एडीएम प्रशासन नख्तदान बारहठ ने बताया कि हमने पानी के अलग-अलग समय में तीन सैंपल भरवाए हैं। सुबह छह बजे, 8 बजे अौर 9.30 बजे। ये सैंपल एसई सिंचाई और पीएचईडी ने किए हैं। इनमें सुबह 9:30 बजे वाले सैंपल में ऑक्सीजन की मात्रा कम आई है। इसलिए सभी गांवों में इसे पेयजल के लिए इस्तेमाल करने से मना किया है।

एसई बोले- हम लोग सुबह शिवपुर हैड गए थे, पानी इतना गंदा कि दूर से बदबू आ रही थी

गंदे पानी के गंगनहर में आने की सूचना पाकर सुबह गंगनहर सर्किल के एसई अरुण कुमार सिडाना, कार्यकारी एसई पीएचईडी वीके जैन शिवपुर हैड पहुंचे। उन्होंने इसे सीधे आगे की नहरों एवं वितरिकाओं में छोड़ने की छूट दे दी। मछलियों में बने जहर के कारण यह पानी और अधिक जहरीला हो सकता है। इसके बावजूद जल संसाधन विभाग ने कहीं भी हैडों पर जाल लगाकर मृत जलीय जीव रोकने का प्रयास नहीं किया। अब यह दुर्गंध पूरे इलाके में फैलेगी। रसायनयुक्त इस पानी में आॅक्सीजन इतनी कम है कि मछलियां जिंदा नहीं रह सकती। ऐसे में जब यह पानी खेतों में जाएगा तो खेतों के मित्र कीट-पतंगे, केंचुओं का जीवन संकट में पड़ जाएगा। खेतों को उर्वरा बनाने वाले बैक्टीरिया पर विपरीत असर पड़ेगा। जिला प्रशासन ने वाटर वर्क्सों में यह पानी भरने पर रोक लगा दी है।

एसई अरुण सिडाना ने बताया कि पानी में कुछ सुधार हुआ है। हरिके हैड वर्क्स पर अब सामान्य पानी आने लगा है। हम लोग सुबह शिवपुर हैड गए थे। पानी बदबूदार है।

असर|कई नहरों के घाट पर पानी पीने से खतरे में पड़ सकता है पशुओं का जीवन

गंगनहर दक्षिण खंड की करणी जी, समेजा, सुलेमान की हैड से निकलने वाली नहरें और एलएनपी में पशुओं को पानी पीने के लिए जगह-जगह घाट बने हुए हैं। जहां घाट नहीं हैं, वहां हैड के किनारे ऐसी जगह बनाई हुई है कि भेड़, बकरियां, गोवंश आदि थोड़े बहुत प्रयास से पानी पी सकता है। इससे उनके जीवन पर खतरा मंडराने की आशंका है।

आरोप|किसान संघर्ष समिति का आरोप, प्रशासन ने ग्रामीणों को नहीं चेताया

किसान संघर्ष समिति, किसान दल, फल सब्जी उत्पादक समिति और आम आदमी पार्टी ने रविवार भास्कर को बताया कि उन्होंने 17 मई कलेक्टर को ज्ञापन देकर पानी की भयावह स्थिति से अवगत कराया था, लेकिन प्रशासन ने रविवार शाम तक गांवों में पटवारी अथवा ग्राम सेवकों के जरिए इस जहरीले पानी को नहीं पीने संबंधी नहीं चेताया है। इससे महामारी फैल सकती है।

चेतावनी|इस सप्ताह चंडीगढ़ में मशाल जुलूस निकालेंगे विभिन्न संगठन

विभिन्न संगठनों के नेताओं ने आरोप लगाया कि गंदे पानी पर रोकथाम के लिए राजनेताओं को फुर्सत नहीं है। जिले के सभी विधायक और एमपी सहित सत्तारूढ़ दल के लोगों का बयान तक नहीं आया है। किसान नेताअों ने कहा कि पंजाब के आप नेताओं और अन्य लोगों को साथ लेकर इसी सप्ताह वे सब मिलकर चंडीगढ़ में प्रदर्शन करेंगे और मशाल जुलूस निकालेंगे।

डिग्गियों में दूषित पानी का भंडारण नहीं करने के निर्देश

नहरों में आ रहा दूषित पानी पेयजल के लिए उपयोग में नहीं लिया जाएगा। कलेक्टर ज्ञानाराम ने जलदाय विभाग के एसई को निर्देश दिया है कि अगले 2-3 दिन ऐसा ही पानी आएगा। इसलिए इसे पेयजल की डिग्गियों में भंडारण न किया जाए। कलेक्टर ने पेयजल विभाग एवं चिकित्सा विभाग को लगातार समय-समय पर पानी के नमूने लेने के निर्देश दिए हैं। इस कड़ी में रविवार को तीन नमूने लिए। पीएचईडी के एसई वीके जैन ने जलदाय विभाग के सभी मोघे बंद रखने के निर्देश दिए हैं।

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