श्रीगंगानगर| लोक देवता बाबा रामदेव ने मानव के कल्याण के लिए धरती पर जन्म लिया था। अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने मानव जाति का भला किया और समाज को जाति बंधन से मुक्त होने की सीख दी। यह उद्गार रविवार को 4 एमएल केदार काॅलोनी स्थित बाबा रामदेव मंदिर में चल रही कष्ट निवारण साप्ताहिक कथा में तीसरे दिन कथावाचक भक्त परीक्षित महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने बाबा रामदेव के जन्म की कथा सुनाई और बताया कि तोमर वंशीय राजपूत में जन्म लेने वाले बाबा रामदेव के पिता अजमल नि:संतान थे। संतान सुख प्राप्ति के लिए इन्होंने द्वारकाधीश की भक्ति की। उनकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने वरदान दिया था। बाबा रामदेव का जन्म संवत् 1409 में भाद्र मास की दूज को हुआ था। उस समय सभी मंदिरों में घंटियां बजने लगीं, तेज प्रकाश से सारा नगर जगमगाने लगा था। कथा के दौरान नन्हे-मुन्हे बच्चों को घर से भगवान के रूप में तैयार कर लाया गया और उन्हें पालने में सुलाकर झुलाया गया। इस दौरान बताया गया कि भगवान की कथा सुनने मात्र से मनुष्य के पाप कट जाते हैं। इसके बाद भक्तजनों ने सवामनी प्रसाद व केले का भोग लगाया, जिसका प्रसाद कथा के दौरान उपस्थित रहने वाले श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।
हरमिलापी श्री हनुमान मंदिर में किया अमृतवाणी पाठ
हरमिलापी श्री हनुमान मंदिर में रविवार सुबह अमृतवाणी पाठ किया गया। सेवादार लवली अरोड़ा ने बताया कि मंदिर संरक्षक कंवरभान मेहता को प्रबंध समिति सदस्यों सहित इलाके के लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। दीवानचंद बतरा ने मेहता के जीवन पर प्रकाश डाला और मंदिर में उनकी ओर से दी गई अमूल्य सेवाओं को याद किया।