भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर
मौसम विज्ञान केंद्र श्रीगंगानगर में करीब 3 माह पहले सीस्मोग्राफ मशीन का सेटअप लगाया जा चुका है। इस मशीन से भूगर्भ संबंधी प्रत्येक गतिविधि का पता लगाया जा सकता है। इसके माध्यम से 700 किलोमीटर के दायरे में आए भूकंप की स्थिति जानी जा सकती है।
इस मशीन के माध्यम से कब-कहां जमीन में क्या हलचल हुई है। यदि भूकंप आया तो उसकी तीव्रता कितनी थी, भूकंप का केंद्र कहां पर था? इन सब सवालों का जवाब अब वैज्ञानिकों को चंद सेकंड में मिल सकेगा। इस मशीन के सिग्नल रोजाना सेटेलाइट के माध्यम से दिल्ली स्थित सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी में भेजे जाते हैं। जहां मौसम विभाग का दिल्ली केंद्र सूचनाओं का आकलन करता है। फिर रिपोर्ट जारी कर दी जाती है।
मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार भूकंप संबंधी कोई गतिविधि होगी तो बहुत ही कम समय में इसकी जानकारी मौसम विज्ञान केंद्र में स्थापित मशीन के माध्यम से कंप्यूटर स्क्रीन पर मिलेगी। इससे पहले यह सब जानकारी अजमेर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र कार्यालय द्वारा हासिल की जाती थी। प्रदेश में अब तक चार जगहों पर यह सीस्मोग्राफ मशीन लगाने का काम हो चुका है। इसमें अजमेर, श्रीगंगानगर, उदयपुर व बीकानेर शामिल हैं। इसके लिए संबंधित कंपनी के लोगों द्वारा ट्रेनिंग देने का काम भी किया जाना बाकी है।
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भूकंप के सिग्नल को सेटेलाइट के माध्यम से नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी भेजेंगे
एक कमरे में पांच फीट गहरा गड्ढा खोद लगाया सेटअप, करोड़ों में लागत
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सीस्मोग्राफ मशीन के पूरे सेटअप में करोड़ों रुपयों की लागत आई है। विभाग के अंदर एक बंद कमरे में पांच फीट का गहरा गड्ढा खोदकर मशीन को एक कंक्रीट का चैंबर बनाकर स्थापित किया गया है। वैज्ञानिक मनोहरलाल रणवां ने बताया कि सेंटर की सीस्मोग्राफ मशीन से पृथ्वी के अंदर की तरंगों और हलचलों की जानकारियों का अध्ययन किया जा सकता है। इसके साथ ही इस सेंटर के जरिए पूरी दुनिया का डाटा लेना आसान हो जाएगा।