- Hindi News
- National
- किसानों का कलेक्ट्रेट पर 5वीं बार पड़ाव; सुनवाई नहीं हुई तो गेट तोड़ एसई कार्यालय में घुसे, अफसरों को घेरा, 2200 क्यूसेक पानी के भरोसे पर माने
किसानों का कलेक्ट्रेट पर 5वीं बार पड़ाव; सुनवाई नहीं हुई तो गेट तोड़ एसई कार्यालय में घुसे, अफसरों को घेरा, 2200 क्यूसेक पानी के भरोसे पर माने
भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर
सिंचाई पानी के लिए लगातार आंदोलन कर रहे किसान बुधवार को फिर जमा हुए। पहले दौर की बैठक में नतीजा नहीं निकला। इसके थोड़ी देर बाद किसानों ने एसई कार्यालय परिसर का नवनिर्मित गेट तोड़ा और अंदर घुस गए। आक्रामक किसानों ने एसई एवं कलेक्टर कार्यालय घेर लिया। इसके बाद लगातार चार दौर की बार्ता के बाद रात 8 बजे समझौता सिरे चढ़ा। फैसले के अनुसार जो नहरें अब तक नहीं खुली, वो अगले एक-दो दिन में खुल जाएंगी। बीबीएमबी की बैठक में गंगनहर के हिस्से में 2200 क्यूसेक शेयर लिया जाएगा।
इससे पहले सुबह 11 बजे गंगासिंह चौक पर गंगनहर क्षेत्र के किसान एकत्र हुए। दोपहर तक सभा चली। इस दौरान कलेक्टर ज्ञानाराम ने उन्हें वार्ता के लिए बुलाया। वार्ता विफल रही। इसके बाद किसान बाहर आ गए। करीब पौना घंटा सभा हुई। फिर किसान उग्र हो गए और गंगासिंह चौक के पास एसई दफ्तर का बंद गेट धक्का देकर खोला और अंदर घुस गए, लेकिन भीतर एसई अरुण कुमार नहीं मिले। करीब पांच सौ किसानों ने नारेबाजी करते हुए एसई कार्यालय व कलेक्ट्रेट को घेर लिया। कुछ देर बाद वहीं धरना लगा दिया। इसके बाद शाम 6 बजे तक किसानों को तीन बार वार्ता के लिए बुलाया। गंगनहर सर्किल के एसई अरुण कुमार ने बताया कि बुधवार को समाप्त हुए सप्ताह में गंगनहर की 1400 क्यूसेक तक की नहरें बंद होंगी। हमारे पास शेष सिस्टम को चलाने के लिए 16-1700 क्यूसेक पानी की जरूरत है। अगर एक सप्ताह बढ़ा हुआ पानी मिला तो अगले सप्ताह से तो 2200 क्यूसेक मिल ही जाएगा। पड़ाव स्थल पर पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल, कांग्रेस नेता पृथीपालसिंह संधू, रणजीतसिंह राजू, सुभाष सहगल, गुरबलपाल सिंह, अमरसिंह बिश्नोई, संतवीरसिंह मोहनपुरा, बॉबी बराड़, गैलेक्सी बराड़, श्योपतराम, राजू जाट, सत्यप्रकाश, कालू थोरी, राकेश ठोलिया, चमकौरसिंह आिद शामिल थे।
भास्कर लाइव
किसानों की सभा में माकपा, कांग्रेस के साथ जिलेभर के गांवों से आए लोग शामिल हुए।
सुनवाई नहीं होने पर भड़के किसान। गेट पर जंजीर थी, जिसे उन्होंने तोड़ दिया।
अलग-अलग मात्रा बताई तो भड़के किसान, कलेक्टर से बोले- एसई आपको पानी की मात्रा कुछ बताते हैं, हमें कुछ और...ये अफसर तो मंत्री के इशारे पर उलझाते हैं, पानी को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए
वार्ता के दौरान कलेक्टर के पूछने पर एसई अरुण कुमार सिडाना ने बताया कि आईजीएनपी में 6500 क्यूसेक पानी चल रहा है, जबकि पेयजल का शेयर 3500 क्यूसेक है। इसके बाद किसानों ने पूछा कि वहां तो केवल पेयजल आवंटित है, वह बताओ कितना है? इस पर सिडाना बोले- 5200 क्यूसेक। यह बात सुन किसान भड़क गए। उन्होंने कहा कि पहले 6500 बताते हो, बाद में 5200 पर आ गए। किसानों ने कहा कि 5200 क्यूसेक पेयजल तो 2020 के बाद दिया जाना प्रस्तावित है। आप किस आधार पर बयान दे रहे हो। दूसरे दौर में कहा कि 5100 इंदिरा गांधी नहर, 1400 गंग कैनाल, 1200 भाखड़ा, 250 खारा सिस्टम और 200 क्यूसेक एसएफ लिंक को आवंटित है। किसानों ने विरोध जताते हुए पूछा कि बांधों के अलावा 900 क्यूसेक गंदा पानी आवंटित है, वह कहां गया? किसान नेताओं ने कहा कि कलेक्टर साहब, ये अफसर आपको घुमा रहे हैं...मंत्री के इशारों पर। आपको कुछ बताते हैं...किसानों को पानी की मात्रा कुछ और दी जाती है। ऐसे में स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
एक सवाल भी... हर बार इंकार, आंदोलन में अचानक कहां से आता है पानी
18 जुलाई 2016... जून में पानी नहीं मिलने के बाद किसानों ने सांकेतिक धरना प्रदर्शन और ज्ञापन देना शुरू किया, लेकिन सरकार ने पानी नहीं दिया। अंतत: 18 जुलाई 2016 को बड़ा पड़ाव डाला तो सरकार को झुकना पड़ा।
15 नवंबर 2016...फिरोजपुर फीडर की रिलाइनिंग, हरिके हैड वर्क्स के गेटों की मरम्मत के लिए पंजाब को पैसा देकर काम करवाने के लिए पड़ाव डालना पड़ा। आखिर डीपीआर तैयार की गई और हैड वर्क्स की सफाई, गेटों की मरम्मत हुई।
4 जनवरी 2017...जनवरी में सरकार बंदी ले रही थी। इस बंदी से रबी की सारी फसलें तबाह हो जाती। इस पर किसानों ने जनवरी के पहले सप्ताह लगातार प्रदर्शन किए। इसके बाद 4 जनवरी को बंदी के विरोध में पड़ाव डाला तो सरकार झुकी।
5 मई 2017...पिछले साल मई का शेयर 1400 होने के बावजूद पानी नहीं दिया गया। मात्र 800 क्यूसेक पानी मिलने से गर्मियों में गन्ना और बाग सूख गए। कपास की बुआई नहीं हो रही थी। इस पर किसानों ने फिर पड़ाव डाला तो मांग मनवा कर उठे।
किसान इसलिए उग्र- गन्ना व बीटी कॉटन का सीजन निकल रहा, पानी मिले तो हो बुआई: किसानों की खरीफ खासतौर से गन्ना, कपास, अमरीकन कपास और बीटी का सीजन हाथ से निकल रहा है। बुआई लक्ष्य की तुलना में एक चौथाई भी नहीं हुई। ऐसे में किसानों के समक्ष आंदोलन के अलावा कोई चारा नहीं बचा। किसान इसी महीने दो बाद प्रदर्शन कर चुके। इस दौरान चेतावनी देकर बुधवार को फिर पड़ाव डाला और मांग मानने पर घरों को लौटे।
एसई बोले- बीबीएमबी बैठक में 2200 क्यूसेक पानी लिया जाएगा, इससे गंगनहर की सभी नहरें चलेंगी
आगे क्या...आज से बढ़ेगा 400 क्यूसेक पानी, 21 मई से मिलेगा 2200
वार्ता में किसानों ने स्पष्ट किया कि बांधों से उन्हें एक बूंद पानी नहीं मिला। हमें तो सीवरेज और फैक्ट्रियों का जहर ही पिलाते रहे। हमारा 17000 क्यूसेक पानी दो। किसानों ने तत्काल शेयर के अलावा 450 क्यूसेक पानी मांगा। किसानों ने आग्रह किया कि अगर 1850 क्यूसेक पानी खखां हैड पर मिल जाता है तो उन्हें एक एक बारी मिल जाएगी। समझौते के अनुसार गंगनहर को अब 400 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मिल जाएगा। इसके बाद भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड की 18 मई को प्रस्तावित बैठक में 2200 क्यूसेक पानी लिया जाएगा। इससे कल से सारी शेष बची नहराें को पानी दिया जा सकेगा। 400 क्यूसेक पानी आने पर नहर में 1800 क्यूसेक पानी हो जाएगा। इधर 900 क्यूसेक तक की नहरें बुधवार रात को बंद होंगी और 500 क्यूसेक का एफ सिस्टम हाल ही बंद हुआ है। इस प्रकार 1400 क्यूसेक तक वाली नहरों में पानी छोड़ने की जरूरत नहीं होगी। शेष नहरें 1800 क्यूसेक में चलाई जा सकेंगी।