सातलखेड़ी। पीपाखेड़ी गांव में 9 मई को रात्रि के समय राष्ट्रीय पक्षी मोर को आवारा कुत्तों ने घायल कर दिया था। मोर की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने उसे बचा लिया। मोर का पैर फ्रैक्चर हो गया था। इस घटना की जानकारी ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को दे दी थी, लेकिन 8 दिन गुजरने के बाद भी विभाग के अधिकारी-कर्मचार मोर को लेने नहीं आए।
वन्यजीव प्रेमी ईश्वर पाटीदार ने बताया कि घायल मोर का प्राथमिक उपचार कर दिया था , और सुबह इस घटना की जानकारी तहसीलदार राधेश्याम मीणा को फोन द्वारा दे दी गई थी। तहसीलदार ने पशु विभाग के डॉक्टर अनिल मीणा को घटना क्रम की जानकारी दी। 10 मई को सुकेत से पशु विभाग से कंपाउंडर दिलीप ने आकर मोर का उपचार किया। पाटीदार ने बताया कि वन विभाग के गौरव मीणा ने यह कहा था कि मैं टीम को भेज रहा हूं, लेकिन कई दिन गुजर जाने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी ने गांव में आकर इस मोर को नहीं देखा।
कर्मचारी मोर लेने नहीं आए तो कोर्ट जाऊंगा: पाटीदार
पाटीदार ने बताया कि राष्ट्रीय पक्षी मोर की आठ दिनों से वो देखरेख कर रह है। मोर को दिन में तीन बार चुगा देता हूं। साथ ही पैर का रोज प्राथमिक उपचार भी करता हूं । अब में इस मोर को अधिक दिन मेरे पास नहीं रख सकता। इसकी जानकारी सभी अधिकारियों को मेरे द्वारा दी जा चुकी है। अगर वन विभाग के कर्मचारी मोर को नहीं ले गए तो मैं कोर्ट में जाऊंगा।
सातलखेड़ी. मोर के साथ पाटीदार।