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सादड़ी थाने से गुम हुई राइफल मिली, थाना स्टाफ की भूमिका संदिग्ध, जांच शुरू
13 अप्रैल की रात को थाने से गायब हुई थी संतरी की राइफल, 17 अप्रैल को स्टाफ क्वार्टर के बाहर मिली
सादड़ी |सादड़ी थाना परिसर से गत 13 अप्रैल की रात को रहस्यमय ढंग से गायब हुई कांस्टेबल की एसएलआर राइफल 4 दिन बाद मंगलवार सुबह 6 बजे थाना परिसर में बने स्टाफ क्वार्टर के पास मिली। शुरू से ही थाने से राइफल चोरी के मामले में थाना स्टाफ की भूमिका को ही संदिग्ध माना जा रहा था। इसी का पता लगाने के लिए मंगलवार सुबह पाली से एमओबी टीम ने मौके पर पहुंच राइफल से फिंगर प्रिंट के निशान लिए, जिसका मिलान संदिग्ध थाना स्टाफ से मिलान किया जाएगा। क्योंकि संतरी की ड्यूटी पर तैनात सिपाही का कहना है कि रात के समय लघुशंका के लिए उसने चंद सैकंड के लिए ही राइफल नीचे रखी थी, जो अनलोड थी। उस दिन नाइट ड्यूटी आफिसर हैडकांस्टेबल तेजराम मीणा थे, जिनके अलावा थाने में कोई आरोपी भी नहीं था। घटना 13 अप्रैल देर रात की है, जिसकी सूचना भी थाना प्रभारी पदमपाल सिंह को दूसरे दिन सुबह दी गई। जबकि 13 अप्रैल की नाइट गश्त कर थाना प्रभारी देर रात को थाने में लौटे थे। ऐसे में राइफल गायब होने के मामले में शुरू से ही थाना स्टाफ की भूमिका ही संदेह के दायरे में है। एसपी दीपक भार्गव ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच सीओ सुमेरपुर अमरसिंह चंपावत को सौंपी गई है, जिनकी जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राइफल चोरी कर फिर से रखने के पीछे क्या है मंशा
पुलिस थाना परिसर में जाकर सरकारी राइफल चोरी की वारदात करने में किसी आम चोर का हाथ होना असंभव दिखाई देता है । अब तक की जांच में किसी स्टाफ की ओर से ही राइफल गायब करने की घटना करना सामने आया है, लेकिन आखिर इसके पीछे किसी की क्या मंशा हो सकती है। इसका पता लगाने के लिए एमओबी टीम ने राइफल के हर तरफ से फिगर प्रिंट लिए। फिंगर प्रिंट के दौरान राइफल पर बोरी के अंश भी लगे मिले, जिससे ये साबित हो गया की चुराने वाले ने राइफल को बोरी में ले जाकर रखा था। फिंगर प्रिंट के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। थानाधिकारी पदमपालसिंह भाटी ने बताया कि चोरी की हुई राइफल मिल गई है। फिंगर प्रिंट लिए गए हैं, जल्द ही मामले में लिप्त आरोपी का पता चल जाएगा।