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हर दिन बादलों की आवाजाही व बिगड़ते मौसम से फसलों पर संकट

3 वर्ष पहले
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जिस फसल को बुवाई से लेकर पकाने तक 6 माह दिन-रात मेहनत की थी, उस पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। किसानों को चिंता है कि उनकी मेहनत पर कही पानी ना फिर जाएं और आगामी साल की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। इतना ही नहीं फसल पर ब्याज भी उन्हें भारी पड़ सकता है। किसान इन दिनों अपने खेतों में काटकर रखी फसलों के आसपास परिवार सहित बैठे हैं और एक ही प्रार्थना कर रहे हैं कि आंधी या बारिश न हो। फिलहाल संकट का साया बरकरार है। जिले के नहरी क्षेत्र में इन दिनों हालात यह है कि हर किसी के मुरब्बे में फसलें काटकर रखी है, उन्हें थ्रेसर की जरूरत है और फसल को बोरियों में भरकर मंडी तक ले जाना है। कई खेतों में अब भी फसलें कटी पड़ी है, जिन पर आसमान में छा रहे बादलों का संकट नजर आ रहा है।

थ्रेसर नहीं मिलने से किसान नहीं ले पा रहे हैं लाटा, चिंता में डूबा रहता है किसान

सुमेरपुर. खेत में गेहूं फसल काटता किसान।

नुकसान की आशंका बढ़ी

मौसम बिगड़ने से नुकसान की आशंका बढ़ी हुई है। पिछले दिनों आंधी व बूंदाबांदी हुई थी, जिससे नुकसान हुआ है। उम्मीद लगाई जा रही है कि आगामी एक सप्ताह तक मौसम साफ रहे तो हम अपनी फसलों को समेट लेंगे। -छगन भाटी, किसान।

इस बार पैदावार भी अच्छी हुई

इस बार शुरू से ही मौसम फसलों के अनुकूल रहा और क्षेत्र में अच्छी बारिश होने से पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा जवाई बांध भी ओवरफ्लो हुआ था। जवाई बांध से किसानों को सिंचाई के लिए चार पाण के माध्यम से 4900 एमसीएफटी पानी दिया गया था। जिससे नहरी क्षेत्रों में अच्छी फसलें तैयार हुई है।

एक सप्ताह मिल जाए तो मुश्किलें खत्म

किसानों का कहना है कि यदि आगामी एक सप्ताह तक बारिश व आंधी नहीं होती है तो काफी हद तक मुश्किलें समाप्त हो जाएगी, लेकिन इसमें भी थ्रेसर की जरूरत रहेगी। यदि वे नहीं मिलेंगे तो नुकसान होगा। बार-बार बदल रहा मौसम फसलों के लिए घातक साबित हो सकता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि एक सप्ताह में 80 से 90 प्रतिशत फसलें मंडियों तक पहुंच जाएगी।

थ्रेसर का किराया आठ सौ से एक हजार रुपए

किसानों ने अपने परिवार व श्रमिकों के साथ मिलकर फसलों को काटकर तैयार कर दिया है। अब उन्हें थ्रेसर की आवश्यकता है। मौसम खराब होने से थ्रेसर को लेकर मारामारी चल रही है। यहां तक कि थ्रेसर का किराया प्रति घंटा 800 से बढ़कर एक हजार रुपए भी हो गया है। मौसम बिगड़ने से हर कोई जल्दबाजी में है। इसके चलते सामान्य किसान को थ्रेसर हाथ नहीं लग रहे हैं। जानकारों के अनुसार अन्य जिलों में फसलों की कटाई पूरी हो जाने से अब वहां से थ्रेसर यहां आ सकते हैं और आगामी 8 से 10 दिनों में सभी को राहत मिल जाएगी।

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