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परशुराम जयंती पर गायत्री मंदिर परिसर में किया हवन-पूजन

3 वर्ष पहले
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बिश्रामपुर| अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम जयंती सर्व ब्राम्हण समाज द्वारा धूमधाम से मनाई गई। स्थानीय गायत्री मंदिर प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में सर्व ब्राम्हण समाज के सदस्यों ने विधिवत हवन पूजन आरती पश्चात समाज के वरिष्ठ सदस्य रघुनंदन लाल दुबे ने परशुराम जी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि परशु प्रतीक है। पराक्रम का राम पर्याय है सत्य सनातन का इस प्रकार परशुराम का अर्थ हुआ पराक्रम के कारक व सत्य के धारक। उन्होंने उपस्थित जनों को बताया कि परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने गए है पिता जमदग्नि और माता रेणुका के पांचवे पुत्र का नाम राम रखा था लेकिन तपस्या के बल पर भगवान शिव को प्रसन्न कर उनके दिव्य अस्त्र परशु (फरसा) प्राप्त करने के कारण वे राम से परशुराम हो गए। श्री दुबे ने उपस्थितजनों को परशुराम के आदर्शों को ग्रहण करने आह्वान कर सभी वर्गों के लिए आदर्श स्थापित करने व समाजिक एकता पर बल दिया। कार्यक्रम में प्रसाद वितरण के बाद 20 अप्रैल को सर्व ब्राम्हण समाज द्वारा सूरजपुर में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित होने की अपील की गई। कार्यक्रम में विजय मिश्रा, राजीव दुबे, अमरपाल मिश्रा, आचार्य राकृष्ण पांडेय, अशोक उपाध्याय, जी. द्विवेदी, विश्वजीत पांडेय, गिरधर तिवारी, सूर्यभान तिवारी, आंनद मिश्रा, उदयभूषण तिवारी आदि मौजूद थे।

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