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बेकाबू लोक परिवहन ने कॉलेज छात्राओं की बस में मारी टक्कर लोगों ने तत्काल मदद कर अस्पताल पहुंचाया...बचा ली 19 जानें
भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर
परशुराम जयंती के मौके पर पदमपुर से श्रीगंगानगर भ्रमण के लिए छात्राओं की कॉलेज बस को लोक परिवहन की बस ने नेतेवाला के पास टक्कर मार दी। हादसे में बस में सवार करीब 19 लोग घायल हो गए। इसमें स्कूल स्टाफ, बस ड्राइवर सहित छात्राएं शामिल थी। कॉलेज बस आगे से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद घायलों को एंबुलेंस की सहायता से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। कॉलेज बस का ड्राइवर गंभीर है, जिसके चलते उसे रैफर किया गया है। मामले में कॉलेज स्टाफ जसवीरसिंह पुत्र चिमनलाल रामदासिया की शिकायत पर लोक परिवहन बस के चालक के खिलाफ चूनावढ़ थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। मामले में बुधवार शाम तक पुलिस ने किसी कि गिरफ्तारी नहीं की थी। जानकारी के अनुसार पदमपुर स्थित गुरमीत सिंह घनश्याम दास कॉलेज की एग्रीकल्चर, बीएड और एसटीसी की छात्राएं बुधवार सुबह भ्रमण के लिए श्रीगंगानगर पहुंची थी। यहां शहर में सीजीआर मॉल, अंधविद्यालय देखने के बाद कॉलेज स्टाफ छात्राओं को वाटर पार्क ले जा रहे थे। कॉलेज की बस जैसे ही नेतेवाला स्थित वाटर पार्क के पास पहुंची तो सामने सूरतगढ़ की तरफ से आ रही लोक परिवहन बस ने टक्कर मार दी। जोरदार धमाके की आवाज सुनकर नजदीक खेतों में काम कर रहे लोग और राहगीर घटनास्थल पर पहुंचे। लोगों ने नेशनल हाईवे ऑथोरिटी की एंबुलेंस सहित अन्य प्राइवेट साधनों से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। लोगों की तत्काल मदद मिलने का फायदा यह हुआ कि हादसे में बेटियों की जानें बच गईं। लोक परिवहन बस के चालक-परिचालक फरार हो गए।
भास्कर लाइव
19 घायल, 9 छात्राएं अस्पताल में भर्ती, बाकी को मरहम पट्टी के बाद मिली छुट्टी: चूनावढ़ पुलिस थाना व जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार कॉलेज के बस चालक बलजीत सिंह, स्टूडेंट इंद्रा, राजदीपकौर, सुमन, सुनीता, सुमन, संगरिया के नगराना की निवासी तनुजा, संगरिया मोड़ांवाली गांव निवासी सागरिका, दिव्यानी और कॉलेज स्टाफ रायसिंहनगर 32 एमएल निवासी विनोद व जसवीर सिंह पुत्र चिमनलाल रामदासिया को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। वहीं उरमन, हीना, अंजू, ज्योशना, मनप्रीतकौर, शुभदीपकौर, कैलाश व अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।
नॉलेज; हादसों में घायल की मदद कीजिए, कोई नाम-पता नहीं पूछेगा
1.सड़क हादसे में घायल होने वाले को तत्काल इलाज के लिए ले जाने वाले व्यक्ति से अस्पताल प्रशासन और पुलिसकर्मी नाम पता नहीं पूछ सकते।
2. हादसे का मददगार थाने नहीं जाना चाहता तो पुलिस अधिकारी सादा कपड़ों में उसके बताए गए स्थान आैर समय पर जाकर जानकारी प्राप्त करेगा।
परशुराम जयंती की छुट्टी पर पदमपुर के प्राइवेट कॉलेज से श्रीगंगानगर घूमने आई थी छात्राएं, नेतेवाला के पास हादसा, चालक-परिचालक मौके से फरार
लोकपरिवहन बस की स्पीड इतनी थी कि हादसे के बाद दीवार को तोड़ते हुए बस खेत में जा घुसी। वहीं, छात्राओं की बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
कॉलेज बस में सवार स्टाफ जसवीर सिंह ने पुलिस को बताया कि लोक परिवहन बस की रफ्तार इतनी तेज थी कि पहले बस में टक्कर मारी, फिर सड़क किनारे बनी दीवार को तोड़ डाला। यही नहीं इसके बाद टूटी दीवार पार करते हुए खेतों में जा घुसी। घटना के वक्त तेज धमाका हुआ, जिससे आसपास के लोग दौड़े चले आए। घटना की जानकारी मिलने के बाद हालांकि प्रशासन और पुलिस समय पर मौका स्थल पर नहीं पहुंचे। इस दौरान पूर्व मंत्री गुरमीतसिंह कुन्नर जिला अस्पताल पहुंचे और घायल छात्राओं का हाल जाना। वहीं घटना की जानकारी मिलने के बाद छात्राओं के परिजन भी जिला अस्पताल पहुंचे।
3. सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को गुड सेमेरिटन से जुड़े निर्देश प्रमुखता से अस्पताल में लिखवाने होते हैं।
4.घायलों के मददगार को तत्काल अस्पताल से वापस जाने की अनुमति होती है। किसी का जीवन बचाने वाले को सरकार की ओर से उचित इनाम भी दिया जाता है।
सिटी हीरो
निजी वाहनों में ही घायलों को अस्पताल लाए, कोशिश थी कि एक भी जान नहीं जानी चाहिए
बुधवार दोपहर बाद करीब 1:30 बजे मैं अपनी जीप में सूरतगढ़ से श्रीगंगानगर की तरफ आ रहा था। नेेतेवाला वाटर पार्क के पास लोग दौड़ते दिखे तो जीप रोकी। मौके पर गया तो पता चला वहां हादसा हुआ था। क्षतिग्रस्त कॉलेज बस में ड्राइवर बुरी तरह फंसा था और छात्राएं भी अंदर थीं। ज्यादातर लोग एंबुलेंस व पुलिस को सूचना देने में जुटे थे। मैंने इंतजार करने की बजाय लोगों की सहायता से मौके पर ट्रैक्टर-ट्रॉली की व्यवस्था की। इसके बाद सबने मिलकर बुरी तरह फंसे ड्राइवर को सूझबूझ के साथ बस से बाहर निकाला। कॉलेज बस का अगला हिस्सा पिचक चुका था। साथ ही छात्राओं को बाहर लाया गया। एंबुलेंस के इंतजार की बजाय निजी वाहनों से ही सभी को अस्पताल ले जाया गया।
(जैसा कि साधुवाली के अमरसिंह बिश्नोई ने भास्कर को बताया। )