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यह पार्किंग स्टैंड नहीं, एसबीआई बैंक के बाहर खड़े वाहनों की कतार है

3 वर्ष पहले
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तस्वीर में आपको जो वाहन दिखाई दे रहे हैं, वह किसी पार्किंग झोन में खड़े वाहन नहीं, बल्कि भारतीय स्टेट बैंक की शुक्रवारिया शाखा के बाहर ग्राहकों के खड़े दो पहिया वाहन हैं। जिनके मार्ग पर खड़े होने से खिड़की दरवाजा की ओर जाने वाले रहवासियों और समीप की जिला सहकारी बैंक में जाने के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

नगर में यातायात और आवागमन की व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए बातें, तो तमाम होती हैं मगर जब भी इन बातों की हकीकत टटोली जाती है, तो नतीजा जीरो ही मिलता है। सालों से बेतरतीब पार्किंग की समस्या यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है। नगरीय क्षेत्र में एक भी पार्किंग झोन नहीं होने से नगर में यातायात व्यवस्था दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। यातायात पुलिस का अभाव इस समस्या को और बढ़ा रहा है। वाहन चालक भी मनमाने स्थानों पर वाहन खड़े करके मुश्किलों को और बढ़ा रहे हैं। नगर के मुख्य चाैराहों पर मेन मार्केट में पार्किंग व्यवस्था के लिए काेई स्थान निर्धारित नहीं होने के कारण लोग कहीं पर भी अपने दो व चार पहिया वाहन खड़े कर देते हैं। इस कारण नगर में आए दिन यातायात व्यवस्था बिगड़ जाती है। इससे नगर के मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति निर्मित होती है जो विवाद का कारण बनती है।

नगरीय क्षेत्र में मिडिल स्कूल ग्राउंड, श्रीराम मंदिर धर्मशाला और पुराना थाना परिसर में वाहन पार्किंग की व्यवस्था कराई जा सकती है। इसके अतिरिक्त पुरानी कृषि उपज मंडी में मांगलिक भवन के समीप, कंठाल नदी के किनारे उमरिया और बामनियाखेड़ी मार्ग पर भी पार्किंग स्थल बनाए जा सकते हैं। इन जगहों पर पार्किंग स्थल बनाए जाने से नगरीय क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से सुधारी जा सकती है।

स्टेट बैंक चौराहे पर इस तरह सड़क पर खड़े रहते हैं वाहन।

इन क्षेत्रों में होती है ज्यादा परेशानी

नगर के सबसे व्यस्ततम स्टेट बैंक चौराहा, पुराना बस स्टैंड, सब्जी मार्केट, हाथी दरवाजा क्षेत्र, पांच पुलिया, डाक बंगला चौराहा, मंडी चौराहा, इतवारिया और शुक्रवारिया बाजार सहित बैंकों के बाहर पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने से ज्यादा परेशानी होती है। इससे ये क्षेत्र पार्किंग में तब्दील हो जाते हैं। लोग दुकानों के सामने वाहन खड़ा करके अपने कामों में लग जाते हैं।

समय-समय पर किए जाते हैं सुधार के प्रयास

ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था नहीं होने से यातायात व्यवस्था को ठीक करने में दिक्कतें आती हैं। फिर भी सीमित संसाधनों से व्यवस्था में सुधार के प्रयास समय-समय पर किए जाते हैं। ओ.पी. मोहटा, थाना प्रभारी सुसनेर।

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