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मजाक बनी समर्थन मूल्य पर चना, मसूर और सरसों की खरीदी, किसान परेशान

3 वर्ष पहले
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10 अप्रैल से शुरू हुई समर्थन मूल्य पर चना, मसूर और सरसों की खरीदी जिलेभर में मजाक बनती जा रही है। उपज बेचने के लिए किसान केंद्रों तक पहुंच भी रहे हैंै। किंतु उनकी उपज को निर्धारित मानको के अनुरूप नहीं होना बताकर रिजेक्ट किया जा रहा है। उपार्जन केंद्रों पर शासन ने सर्वेयर नियुक्त किए है, लेकिन इन केंद्रों पर कब और किस समय पहुंचेंगे, इसका पता जिम्मेदारों को भी नहीं है। अपनी उपज बेचने के लिए आने वाले किसानों को अधिकारियों के आश्वासन ही मिलते है। आश्वासनों को झेलते-झेलते किसान थक हार कर अपनी उपज व्यापारियों को बेचकर घर चला जाता हैं।

शासन ने चने का समर्थन मूल्य केंद्र और राज्य सरकार के बोनस के साथ 4500 रुपए प्रति क्विंटल तथा मसूर का भाव 4350 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन व्यापारी इन दोनों को 3200 से 3500 रुपए प्रति क्विंटल के मान से मंडी में खरीद रहे हैं। इससे लगभग 1000 रुपए प्रति क्विंटल की चपत किसानों को लग रही है। जिले में जहां भी खरीदी के लिए उपार्जन केंद्र बनाए गए है वहां की व्यवस्थाएं संभले नहीं संभल रही है। सुसनेर क्षेत्र की सोसायटी में समर्थन मूल्य पर चना व मसूर बेचने के लिए पंजीयन कराने वाले किसानों को एसएमएस भेजकर कभी सोयत उपज बेचने के लिए कहां जा रहा है, तो वहीं किसी डोंगरगांव और सोयत क्षेत्र के किसान को सुसनेर की मंडी में फसल बेचने के एसएमएस भेजे जा रहे है। इससे किसान परेशान हो रहा हैं। सुसनेर के कृषक विमल जैन तथा प्रेम जैन को अपनी उपज बेचने के लिए सोयत ले जाने का मैसेज मिला। उन्होंने पंजीयन तो सुसनेर कराया था। अब वे असमंजस में है कि वे करे तो क्या करे। दो दिन पहले कृषि उपज मंडी में कलारिया के सजनसिंह नामक कृषक का चना और मसूर समर्थन मूल्य पर खरीदा गया था। किंतु खरीदने के थोड़ी देर बाद ही सर्वेयर ने उसकी उपज को रिजेक्ट कर दिए जाने की सूचना किसान को दी। समर्थन मूल्य पर चना, मसूर और सरसो की खरीदी के लिए प्रशासन ने जिले में कुल 15 उपार्जन केंद्र अभी तक बनाए है। जानकारी के अनुसार इनमें से 6 केंद्रों ने अभी तक खरीदी शुरू ही नहीं की है। नलखेड़ा मार्केटिंग, पीएसीएस तनोड़िया, नरवर, बापचा, खैराना तथा मोड़ी केंद्रों पर खरीदी शुरू नहीं हुई है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन की व्यवस्थाएं कितनी कारगर साबित हो रही है। 10 अप्रैल से शुरू हुई समर्थन मूल्य पर चने, मसूर और सरसो की खरीदी में 14 अप्रैल तक शासन ने मात्र 226 क्विंटल 50 किलो उपज खरीदी है। जबकि जिले की कृषि उपज मंडियों में व्यापारियों ने इससे 10 गुना उपज समर्थन मूल्य से कम दाम पर खरीदी है।





इतने किसानों ने कराया है पंजीयन -

समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने के लिए पूरे आगर जिले में बड़ी संख्या में किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। विभाग की वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के अनुसार पूरे जिले में चने के लिए 18 हजार 321, सरसो के लिए 3 हजार 116, मसूर के लिए 14 हजार 448 तथा प्याज के लिए 5 हजार 192, लहसुन के लिए 6 हजार 587 किसानो ने पंजीयन कराया है। जिला प्रशासन के लिए इतने सारे किसानों की उपज निर्धारित समयावधि में खरीद पाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।

समझाइश दे दी गई है

समर्थन मूल्य पर चना, मसूर और सरसो को बेचने के लिए एसएमएस भोपाल से आ रहे है। इससे किसानों को परेशानी आ रही है। इसकी जानकारी से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है। शुरू में जो सर्वेयर आए थे वे नए लड़के थे। उनकी कुछ किसानों से बोलचाल हो गई थी। सबको समझाइश दे दी गई है। के. एल. यादव, एसडीएम सुसनेर

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