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512 गांव और सीमांकन करने के लिए 4 मशीनें, करना पड़ रहा लंबा इंतजार

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | आगर-मालवा

शासन का आदेश है कि सीमांकन का काम ईटीएस (इलेक्ट्राॅनिक टोटल स्टेशन) मशीन से कराया जाए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिले में यह मशीनें केवल 4 ही हैं। जबकि राजस्व निरीक्षक वृत्त (आर.आई. सर्किल) कुल 9 हैं। ऐसे में महज 4 मशीनों से आने वाले 512 गांवों में सीमांकन करना राजस्व अधिकारियों के लिए चुनौती बना रहता है। सीमांकन कराने वाले किसानों को भी इंतजार करना पड़ता है।

सीमांकन मशीनों के माध्यम से ही कराया जाए, जैसा आदेश शासन द्वारा निकाला तो गया, लेकिन सीमांकन के लिए पर्याप्त मात्रा में मशीन जिले में नहीं पहुंचाई गई। बता दें आगर जिले में 227 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत 512 गांव आते हैं। इनमें 1 लाख 63 हजार 333 किसान रहते हैं। इनमें से आधे से अधिक किसानों को समय-समय पर सीमांकन कराने की जरूरत पड़ती है, लेकिन ईटीएस मशीन केवल 4 होने से न केवल राजस्व अधिकारियों को दिक्कत आती है, बल्कि किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि सोयतकलां क्षेत्र के किसी किसान को सीमांकन कराना होता है, तो सुसनेर से यह मशीन 30-35 किमी दूर पहुंचानी पड़ती है। यदि मशीन किसी दूसरे क्षेत्र में सीमांकन कार्य में उपयोग आ रही हो, तो किसान के पास इंतजार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता।

12 से 15 लाख रुपए सरकारी कीमत की इस मशीन से 4 किलोमीटर दूर के पाइंट को भी आसानी से देखा जा सकता है। इसमें लेंस को छोटा-बड़ा करने की सुविधा होती है। सीमांकन करने के लिए सामान्यतः इसे बीच में ऐसी जगह लगाया जाता है जहां से चारों तरफ आसानी से देखा जा सके। यदि ऐसी जगह नहीं होती है, तो इस मशीन को पहले एक स्थान पर बाद में दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर उस एरिए का सीमांकन किया जाता है। बड़ा तालाब का सीमांकन करने के दौरान इस मशीन को पहले चिंताहरण गणेश मंदिर की छत पर शिफ्ट किया गया था। वहां से सीमांकन करने के बाद इसे तालाब के दूसरे किनारे पर मजार के पास शिफ्ट करके पूरे तालाब का सीमांकन किया गया था। जिस खेत का सीमांकन करना होता है उसकी मेड पर रिफलेक्टर ले कर व्यक्ति को खड़ा किया जाता है। लाइका जीओ सॉफ्टवेयर के माध्यम से इसमें फिल्ड बुक भी तैयार होती है तथा नक्शा भी तैयार होकर आ जाता है। बंटाकन की भी इसमें सुविधा है। पुराने पाइंट को सर्च भी किया जा सकता है। इस मशीन की विश्वसनीयता इसलिए भी है क्योंकि यह एयर डिस्टेंस से सीमांकन करती है। जबकि जरीब (नापने की यूनिट) से सीमांकन किया जाता है, तो जमीन उबड़-खाबड़ होने पर एक दो जरीब का अंतर आ जाता है।

बड़े तालाब का ईटीएसएम से किया गया था सीमांकन।

होना चाहिए 16 मशीनें
पूर्व में जिले में राजस्व संबंधी कामकाज की दृष्टि से 9 आर.आई. सर्किल हैं, लेकिन कलेक्टर द्वारा 21 मार्च को पटवारी हल्का व आर.आई. सर्किल का पुन:गठन करने के बाद जिले में 16 आर.आई. सर्किल हो चुके हैं। यह नई व्यवस्था जल्द ही लागू होने वाली है। ऐसे में 4 मशीनों से काम हो पाना संभव नहीं है। 16 सर्किल में कम से कम 16 मशीनें होनी चाहिए, अन्यथा किसान परेशान होते रहेंगे। भ्याना के मूल निवासी श्यामलाल जो सोयतकलां के पास काम करते हैं, ने बताया सीमांकन के लिए करीब 15 दिन पहले आदेश हो चुका है, लेकिन मेरा नंबर अभी तक नहीं आया। अधिकारियों से इन्होंने बात की, तो अधिकारियों ने कहा कई सारे लोगों के सीमांकन अभी किए जाना बाकी है। ऐसे लोगों की संख्या सैकड़ों में है।

राजस्व अधिकारियों से भी सीमांकन करा लेते है
सीमांकन कार्य ईटीएसएम से कराए जाने के आदेश मिले थे, लेकिन मशीनों की कमी के चलते नियमों में शिथिलता की गई है। जरूरत पड़ने पर राजस्व अधिकारियों के दल से भी सीमांकन कराए जा रहे हैं। 15 मशीन और जिले के लिए उपलब्ध कराने के संबंध में कलेक्टर के माध्यम से पत्र भेजा गया है। राजेश सरवटे, अधीक्षक जिला भू-अभिलेख आगर-मालवा।

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