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शौचालय के नाम पर फर्जीवाड़े के शिकार लोगों से मिले अफसर, बोले- बहुत गड़बड़ियां हुई हैं

3 वर्ष पहले
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नगरीय क्षेत्र में बनाए गए 617 शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ियों का भास्कर द्वारा खुलासा करने के बाद शुक्रवार को प्रशासन सक्रिय हुआ। कलेक्टर अजय गुप्ता ने डिप्टी कलेक्टर मनीष जैन को जांच अधिकारी नियुक्त किया। शुक्रवार को शौचालयों का भौतिक सत्यापन किया गया। इसमें कई खामियां मिलीं, जिस पर उन्होंने स्वीकार किया कि गड़बड़ियां हुई हैं।

जांच अधिकारी ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर जानकारी ली। एसडीएम के.एल. यादव ने शिकायत करने वाले परवेज मोहम्मद के लिखित में कथन लिए। इसके बाद नगर परिषद कार्यालय से शौचालयों से संबंधित दस्तावेज लेकर जांच की। वार्ड-6 के हितग्राही विजयसिंह पिता सजनसिंह ने नगर परिषद पहुंचकर जांच अधिकारी को बताया कि उसके नाम पर दो शौचालयों की राशि निकाली गई है। एक बार उसे वार्ड-6 का रहवासी, तो दूसरी बार वार्ड-7 का रहवासी बताकर। एक अन्य हितग्राही डालीबाई के परिजन ने भी लिखित में बताया ठेकेदार ने उनसे कहा था शौचालय बनवा लो। मैं राशि दे दूंगा, लेकिन ठेकेदार ने राशि अभी तक नहीं दी। सोयत रोड स्थित गोवर्धनलाल के शौचालय का निरीक्षण किया गया, जो निर्माण के बाद टूट गया। उसके बाद दोबारा बनाया, लेकिन गड्‌ढा नहीं बन पाया।

भास्कर की पड़ताल में खुली पोल, ये हैं जिम्मेदार जिन्होंने ठीक से काम नहीं किया
क्या जिम्मेदारी थी
तेजकरण गुनावदिया

उस वक्त नगर परिषद सुसनेर के सीएमओ थे। इनकी जिम्मेदारी थी कि शौचालय निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर सत्यापन करके चेक पर हस्ताक्षर करें

राहुल साधिया

उस वक्त नगर परिषद सुसनेर के प्रभारी उपयंत्री थे। इनकी जिम्मेदारी थी- एमबी बनाना, मौके पर हितग्राहियों की जांच करके लेआउट देना, निर्माण की देख-रेख करना

अफसर जांच करने पहुंचे तो लोगों ने बताया- कैसे उनके साथ धोखा हुआ
साहब! शौचलय के लिए इतने छोटे-छोटे गड्‌ढे किए हैं, कैसे करें उपयोग
नए बस स्टैंड के समीप स्थित एक बस्ती में जब भौतिक सत्यापन के लिए डिप्टी कलेक्टर पहुंचे, तो हितग्राहियों ने कहा साहब! शौचालयों के गड्‌ढे बहुत छोटे हैं, जो भर गए हैं। अब आप ही बताओ, कैसे उनका उपयोग करें। बस्ती में करीब 6 लोगों से डिप्टी कलेक्टर ने चर्चा की। इस बस्ती में शौचालयों के अंदर रखे लकड़ी और कंडे के फोटो भी खींचे। उन लोगों के भी नाम नाेट किए, जिनके यहां अभी तक शौचालय नहीं बनाए गए हैं।

किया क्या
कुछ भी नहीं देखा और चेक पर हस्ताक्षर करते गए, भुगतान भी करवा दिया गया।

एमबी तो बनाई, लेकिन निर्माण की कोई भी जांच ठीक से नहीं की, गुणवत्ता भी नहीं देखी।

...और अब ऐसे दे रहे जवाब
एक सीएमओ हर शौचालय का निरीक्षण तो नहीं कर सकता है। उपयंत्री ने जो दस्तावेज पेश किए, उसके आधार पर संबंधित ठेकेदार को भुगतान मेरे द्वारा किया गया है। अगर शौचालय निर्माण में कोई भी गड़बड़ी हुई है, तो उसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है।

जितने भी शौचालय का निर्माण किया गया है, मैंने तो सिर्फ उन निर्माण कार्यों के हिसाब से मूल्यांकन किया है। अब वहां पर क्या गड़बड़ी हुई मुझे नहीं पता। मुझ पर जो भी आरोप शौचालय निर्माण में गड़बड़ियों के लगाए जा रहे हैं, वे सभी गलत हैं।

हां, शौचालय के निर्माण में गड़बड़ियां सामने आई हैं

नगरीय क्षेत्र में शौचालयों के निर्माण के भौतिक सत्यापन में पात्र हितग्राहियों को लाभ न देकर अपात्रों को लाभ पहुंचाना, गड्‌ढों का सही तरीके से निर्माण नहीं किया जाना, शौचालय नहीं बनाकर हितग्राहियों को राशि देकर उनसे निर्माण के कागजातों पर हस्ताक्षर करवा लेना, जैसी कई गड़बड़ियां अब तक सामने आई हैं। इस मामले की जांच रिपोर्ट बनाकर जिला कलेक्टर को जल्द ही सौंप दी जाएगी। मनीष जैन, डिप्टी कलेक्टर व जांच अधिकारी आगर।

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