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घर से बाहर निकलकर संगठित हुई महिलाएं खेत, बाजार और मंच से दिखाई अपनी ताकत

3 वर्ष पहले
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कभी घर की चार दीवारी में निर्णय से वंचित रहने वाली महिलाएं अब समाज में निर्णायक भूमिका के लिए तैयार हो रही हैं। बदलाव आया है, तो महिलाओं के संगठित होने से वे और संगठित हुई हैं, स्व-सहायता समूहों के जरिए। इसमें मुख्य भूमिका निभाई मप्र डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने। आगर-मालवा जिले में महिलाओं के 3 हजार 596 स्व-सहायता समूह बने हैं। हर समूह में 10 से 12 महिलाएं हैं। इस हिसाब से कुल मिलाकर 35 हजार 960 महिलाएं हैं जो अपने हाथों से अपने परिवार के साथ अपने गांव की तरक्की की तकदीर लिख रही हैं। इन स्व-सहायता समूहों से इतने ही परिवार जुड़े हुए हैं। इन महिलाओं में अपनी पारिवारिक और सामाजिक स्थितियों में बदलाव और स्वयं निर्णय लेने की क्षमता विकसित हुई है।

ग्राम नान्याखेड़ी तहसील आगर की महिला राजूबाई के पति की मौत कैंसर से होने के बाद परिवार की मदद करने वाला कोई नहीं था। राजूबाई अकेली पड़ गई थी। समूह से जुड़ने के बाद उसने बच्चे के लिए मैजिक वाहन खरीदा। बहू के लिए साबुन निर्माण कार्य शुरू किया। अपने परिवार के लिए मकान निर्माण करवाया तथा स्वच्छता प्रेरक बनकर कई पंचायतों को खुल में शौच से मुक्त कराने में सहयोग किया।

ग्राम कचनारिया तहसील आगर की रेखाबाई ने समूह से जुड़ने के बाद वाॅशिंग पाॅवडर का निर्माण शुरू किया। गुलाब और अन्य फूलों की खेती भी शुरू की। आज रेखाबाई 10 हजार रुपए प्रतिमाह से भी अधिक की कमाई करके परिवार और गांव के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।

कानड़ क्षेत्र के गांव कुंडलायखेड़ा की पवित्राबाई ने समूह के आजीविका गतिविधि संचालन केंद्र को चलाकर आत्मनिर्भर बन रही है। इस केंद्र से सेनेटरी नेपकीन, अगरबत्ती निर्माण व दोना-पत्तल निर्माण का काम होता है। पवित्राबाई रोजगार परामर्श केंद्र भी संचालित कर रही है।

ऐसे बदल रही तस्वीर

महिला समूह जहां स्वयं आगे आकर नियमित रूप से बैठक कर बचत, लेन-देन व ऋण वापसी के नियमों को अपना रहे हैं। वहीं दूसरी महिलाओं को समूह गठित करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। समूह की महिलाएं गांव की अन्य महिलाओं के पास जाकर शासन की योजनाएं समझाती हैं, तो उन्हें समूह से जोड़ती हैं। पिछले 3 सालों में दो हजार समूहों को 25 करोड़ रुपए से भी अधिक की वित्तीय सहायता शासन से मिली है। इस सहायता का उपयोग महिलाएं अपने परिवार तथा गांव के विकास में कर रही हैं।

खेत में गुलाब के पौधों के साथ रेखा बाई।

स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अपने उत्पादन की प्रदर्शनी के साथ।

गरीबी उन्मूलन की दिशा में अहम कदम

मिशन का उद्देश्य गरीबी उन्मूलन के लिए ग्रामीण महिलाओं की संस्थाओं का निर्माण करना है। इससे वित्तीय, तकनीकी एवं विपणन सेवाओं तक उनकी पहुंच बन सके। अब गरीब महिलाओं के संगठन निर्णायक साबित होने के साथ सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी एकजुट होने लगे हैं। जिले में 3 हजार 596 स्व-सहायता समूहों से जुुड़ी 35 हजार 960 महिलाएं सामाजिक, अार्थिक और पारिवारिक बदलाव की वाहक बन रही हैं। हेमंत कुमार राजावत, जिला परियोजना प्रबंधक, एनआरएलएम आगर।

राजू बाई ग्राम नान्याखेड़ी सम्मेलन में अपने उत्पाद बताती हुई।

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