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वर्षा की भविष्यवाणी के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है केरूण्डा बाबा रामदेव धाम

3 वर्ष पहले
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केरूण्डा बाबा राम देव का यह मंदिर बहुत पुराना है। बाबा रामदेव के चाचा धनराज महाराणा मोकल के यहां कुंभ महोत्सव संत समागम कार्यक्रम में रामदेव के प्रतिनिधि के तौर पर अश्वरोह होकर रूणेचा से मदारिया जा रहे थे। तब केरूण्डा की नाल में प्यास लगी। अपनी प्यास बुझाने के लिए रामदेवजी से परचा मांगा और केरूण्डा वर्तमान मंदिर के पास जलधारा फुट पड़ी । जो आज तक अविरल रूप से बाह रही है। भयंकर अकाल में भी नहीं सूखती। इसके बाद रामदेव जी दूसरा परचा केरूण्डा से मण्डावर (घटावड़) आते वक्त विशाल शिला अवरोध बनी तो उसे भाले से तोड़ दिया जो आज प्राकृतिक केरूण्डा द्वार है जिसे कमाड भाटा कहते है। उसके बाद मदारिया संत समागम में भाग लिया। इसी संत समागम में महाराणा कुंभा के घड़ा (कुम्भ) से अवतरन की घटना हुई। मदारिया से लौटते वक्त मियाला आने पर बाबा रामदेव जी की रूणेचा में समाधि की सूचना पर तुरंत धनराज जी ने समाधि ले ली। मियाला में भव्य मंदिर बना है जिसे छोटा रूणेचा भी कहते है। केरूण्डा में भी प्राचीन समय का मंदिर बना है। और कमाडभाटा में हाल ही में घोड़े की खुर व धनराज जी के पगलिये पर भी मंदिर बना है। मेला संयोजक व केरूण्डा मंदिर समिति अध्यक्ष पन्ना सिंह रावत ने बताया की मन्दिर के विकास के साथ आवागमन की सुविधा विस्तार के लिए निरंतर प्रयासरत है।

वैज्ञानिक युग में गजब चमत्कार
वर्तमान 21 वीं सदी वैज्ञानिक युग है पर धधकते अंगारों पर कच्चे धागे के नहीं जलने, सूखे कुण्ड में पानी आने, वर्षा की सटीक व शत प्रतिशत सही भविष्यवाणी के हर वर्ष सत्य साबित होने से परंपरागत रूप से हजारों वर्षों से लोगों का श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है

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