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जय जय राजस्थानी, मायड़ नै मिल्यग्यो मान

3 वर्ष पहले
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चौदह करोड़ से अधिक लोगों की मायड़ भाषा राजस्थानी में अब विद्यार्थियों को पढाई करने की उम्मीद अब साकार होती नजर आ रही है। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.भगीरथ बिजारणियां ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के आगामी सत्र में स्ववित्तपोषित योजना के तहत राजस्थानी विभाग प्रारंभ करने की घोषणा की है। कुलपति ने विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा विभाग प्रारंभ करने की मांग लेकर पहुंचे नगर के साहित्यकारों, वरिष्ठजनों और युवाओं को आश्वासन देते हुए विद्या परिषद की बैठक में राजस्थानी भाषा विभाग प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखने और विभाग को प्रारंभ करवाने का पुरजोर प्रयास करने का भरोसा दिलाया। मुक्ति संस्था की ओर से साहित्यकार राजेंद्र जोशी के संयोजन में कुलपति से बातचीत करते हुए शिष्टमंडल ने विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा विभाग प्रारंभ करने और विभाग प्रारंभ होने पर राजस्थानी भाषा में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को मायड़ भाषा में पढ़ने की बरसों पुरानी इच्छा पूरी होने की बात बताई। कुलपति सचिवालय में इस दौरान प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करते हुए कुलपति ने इस संबंध में राज्य सरकार को भी विभाग प्रारंभ करने की अभिशंषा की जाएगी जिससे की युवा पीढ़ी अपनी मायड़ भाषा में सहजता के साथ अध्ययन कर सके। विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा विभाग प्रारंभ होने पर राजस्थानी भाषा में एमए, बीए करने वाले सैंकड़ो विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। डूंगर कॉलेज में वर्ष 1988 में राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना की गई थी जिसे स्ववित्त पोषित योजना के तहत संचालित किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा विभाग प्रारंभ करने की घोषणा समूचे राजस्थान के लिए सुखद घोषणा है। करोड़ों लोगों के मान की मायड़ भाषा में अब विद्यार्थियों को बहुत कुछ करने और भाषा के विकास में भागीदारी निभाने के अवसर हासिल होंगे। - डॉ.अर्जुनदेव चारण, पूर्व संयोजक राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल, साहित्य अकादेमी, दिल्ली

मान्यता के लिए दशकों से प्रयासरत राजस्थान के निवासियों के लिए यह घोषणा प्रसन्नता देने वाली है। विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा विभाग के प्रारंभ होने से भाषा मान्यता आंदोलन को मजबूती मिलेगी। - डॉ.मंगत बादल, राजस्थानी साहित्यकार

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