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छत्तीसगढ़ का चिंतागुफा थाना 8 साल में 150 जवानों की दे चुका है शहादत; यह देश में सबसे ज्यादा, फिर भी थाना टपरे के नीचे

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज नेटवर्क | जगदलपुर

छत्तीसगढ़ में सुकमा जिले का चिंतागुफा थाना। यहां पिछले 8 साल में 150 जवानों की शहादत दी जा चुकी है। जो कि देश में सबसे ज्यादा है। एक दशक में इतनी शहादत देश के किसी भी थाने में तैनात जवानों ने नहीं दी है। फिर भी वर्तमान समय में ये थाना टीन-टप्पर के नीचे संचालित किया जा रहा है। दरअसल यह पूरा क्षेत्र नक्सलियों का गढ़ माना जाता है। क्षेत्र में अकेला पुलिस वाला घूम नहीं सकता। किस पेड़, किस सड़क, किस पगडंडी में बम गड़ा है या नक्सली खड़े हैं किसी को नहीं पता। सुरक्षा बलों के जवानों और नक्सलियों के बीच गोलीबारी अब आम हो गई है। इलाके की संवेदनशीलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस स्थान पर थाना और कैंप संचालित है उस स्थान की फोटोग्राफी तक जवान नहीं करने देते। चिंतागुफा थाना ने इतनी शहादतें दी लेकिन अभी तक यहां पक्का थाना भवन ही नहीं बन पाया है। यहां टीन टप्पर से जोड़कर सीआरपीएफ कैंप और थाना एक साथ चलाया जा रहा है।

थाना परिसर में शहीद जवानों की याद में बनाया स्मारक

स्मारक पर शहीद जवानों के नाम लिखे

यहां पक्के भवन के अभाव में जवानों को हर मौसम में तकलीफ झेलनी पड़ती है। बारिश में पानी और जहरीले जंतुओं का खतरा तो गर्मी में लू का वहीं ठंड में शीतलहर झेलकर जवान यहां दिन-रात काट रहे हैं। यहां शहीद हुए जवानों की याद में स्मारक भी बनाया गया है, जिसमें शहीद जवानों के नाम लिखे गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि जिन जवानों ने यहां विकास और सुरक्षा देने की चाह में अपनी जान दी है उन्हें लोग याद रखें।

ताड़मेटला की घटना भी यहीं पर हुई थी

ताड़मेटला में नक्सलियों ने एक साथ सीआरपीएफ के 76 जवानों को मौत के घाट उतार दिया था। पूरे देश में यह सबसे बड़ी घटना थी। ताड़मेटला भी चिंतागुफा थाना क्षेत्र का ही हिस्सा है। पहले यह इलाका दंतेवाड़ा जिले में आता था लेकिन नए जिले के तौर पर सुकमा का उदय होने के बाद अब चिंतागुफा सुकमा जिले का हिस्सा है और यहां नक्सली दबाव को देखते हुए इसे थाना घोषित किया गया है।

पहले दंतेवाड़ा जिले में था, सुकमा के जिला बनने के बाद इस यहां शामिल हुआ

ब्लास्ट में घायल हुए जवान को रायपुर रेफर किया

भास्कर न्यूज नेटवर्क | सुकमा

चिंतागुफा में बूबी ट्रैप ब्लास्ट की चपेट में आकर घायल हुए डीआरजी के जवान देवनाथ द्वार को हेलीकॉप्टर से रायपुर रेफर किया गया। एएसपी शलभ सिन्हा ने बताया कि जवान की हालत खतरे से बाहर है। उसे बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर किया गया है। गौरतलब है कि चिंतागुफा थाने से डीआरजी जवानों की टुकड़ी सर्चिंग के लिए रवाना हुई थी। इसी दौरान देवनाथ नक्सलियों के बूबी ट्रैप ब्लास्ट की चपेट में आकर घायल हो गया था। ब्लास्ट के बाद जवान को तुरंत चिंतागुफा कैंप लाया गया। यहां स्थित सीआरपीएफ के कैंप अस्पताल में जवान का प्राथमिक उपचार किया गया।

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