भागवत कथा विश्राम पर निकली शोभायात्रा, भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा हुई
ताल | मनुष्य धन में मन को इतना लगा लेता है कि वह स्वयं को भूल जाता है। इसलिए मन को स्थिर रखें, भटकने नहीं दें। हमें धन का सही उपयोग करते हुए पुण्य कर्मों की प्राप्ति में मन लगाएं। यही मनुष्य का सिद्धांत होना चाहिए। यह बात भागवत भूषण बालकृष्णजी महाराज ने करवाखेड़ी में चल रही भागवत कथा विश्राम पर कही। शंकर मंदिर से भगवान गणेशजी, रिद्धि-सिद्धि प्रतिमा की शोभायात्रा निकाली। लोगों ने घरों के बाहर रंगोली बनाई। विभिन्न स्थानों पर शोभायात्रा का पुष्पवर्षा से स्वागत किया। आतिशबाजी की। मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। यज्ञाचार्य पूरालाल पांडे ने यज्ञ, हवन करवाया। 51 जोड़ों ने धर्मलाभ लिया। आरती के बाद प्रसादी वितरित की गई। राजेंद्रसिंह सिसौदिया, रामेश्वर प्रजापत, मोहनलाल सूर्यवंशी, शंकरलाल पाटीदार, पुष्पेंद्रसिंह, विक्रमसिंह सहित श्रद्धालु मौजूद थे।