समर्पण और सच्चे भाव से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव
ताल | आत्मा से परमात्मा का मिलन, भक्ति, साधना और सतगुरु की कृपा से प्राप्त होता है। वासुदेव और देवकी को कारावास गृह में भगवान के प्रति स्मरण, निरंतर परमात्मा पर भ्रम की प्राप्ति हुई। संसार में भगवान की प्राप्ति करना दुर्लभ नहीं है। इसके लिए केवल समर्पण और सच्चे भाव मन में होना चाहिए। यह बात संतश्री बालकृष्ण महाराज ने करवाखेड़ी में भागवत कथा दौरान कहीं। रविवार को भगवान गणेश की प्रतिमा का पूजन किया। यज्ञाचार्य पुरालाल पांडेय सहित 11 पंडित के सान्निध्य में यज्ञ चल रहा है। आरती में बड़ी तादाद में श्रद्धालु मौजूद थे।