सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो रहे जस्टिस जे चेलमेश्वर ने एक करोड़ रुपए दिन की फीस लेने वाले वकीलों को लेकर कहा है कि वे किसी मुद्दे पर मुंह नहीं खोलते हैं और अपना स्टैंड कभी जाहिर नहीं करते हैं। यदि कभी मुंह खोलते भी हैं तो सिर्फ अपना स्टेटस बनाए रखने के लिए ही ऐसा करते हैं। जस्टिस चेलमेश्वर वकीलों के एनजीओ लायर कलेक्टिव के कार्यक्रम में बोल रहे थे। इससे पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के विदाई समारोह में शामिल होने से मना करते हुए कहा था कि रिटायरमेंट उनका निजी मामला है, इसको सार्वजनिक रूप नहीं दिया जाना चाहिए। चार सीनियर जजों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के मामले में उन्होंने कहा कि वह कुछ मुद्दों और सिद्धांतों के लिए खड़े हुए। शेष |पेज 9 पर
वह किसी के खिलाफ नहीं थे। इसमें कोई स्वार्थ नहीं था।
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युवा पीढ़ी का साथ मिला :
12 जनवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, “युवा पीढ़ी के वकीलों ने न्यायपालिका के लोकतंत्रीकरण के लिए उनका समर्थन किया, तो पुराने वकीलों और सेवानिवृत्त जजों ने हमले किए। प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो उन्होंने सवाल उठा दिए- क्या जज को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए? जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, “मैंने अपने किसी भी फैसले के बचाव के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। पता था कि सार्वजनिक रूप से जब मुंह खोलूंगा तो ये सब बातें कही जाएंगी।’
जो गलत लगे, उसे रोकना चाहिए
जस्टिस चेलमेश्वर ने उनके आवास पर आए वकीलों के एक समूह से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘मैं मुद्दों और मूल्यों पर खड़ा रहा। जब मुझे लगा कि चीजें गलत दिशा में जा रही हैं, तब मैंने सवाल खड़े किए। मेरा मानना है कि अगर अच्छा हो रहा है तो उसे मंजूर करना चाहिए। कोई बात संदिग्ध है या संदेह है, तो उसकी पड़ताल करना चाहिए। गड़बड़ी मिले तो उसे ठीक करने का प्रयास करना चाहिए। अगर कुछ गलत है, तो उसे खत्म करना चाहिए। इसमें निजी हित या किसी की मुखालफत जैसा कुछ नहीं है। यह व्यवस्था से जुड़ा मामला है।