हीमोफीलिया के लक्षणों के बारे में बताया
सेंट सोल्जर डिवाइन पब्लिक स्कूल में हीमोफीलिया दिवस पर विशेष लेक्चर करवाया। अध्यापिका सतविंदर कौर के नेतृत्व में करवाए लेक्चर का मुख्य उद्देश्य छात्रों को हीमोफीलिया रोग के बारे में जागरूक करना था। इस मौके प्रिंसिपल इंदर कुमार साहनी के अलावा अध्यापिका गुरप्रीत कौर व राजवंत कौर ने भी अपने विचार रखे।
प्रिंसिपल साहनी ने बताया कि हीमोफीलिया सबसे पुराने जेनेटिक रक्तस्राव रोग में से एक है। इस बीमारी में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। ऐसे में कोई छोटी चोट लगने पर भी रोगी को काफी देर तक रक्तस्राव होता रहता है। खासतौर हीमोफीलिया के रोगियों में घुटनों और कोहनियों के अंदर होने वाला रक्तस्राव अंगों और ऊतकों को भारी नुकसान पहुंचाता है। रोग के लक्ष्णों संबंधी बताते अध्यापिका राजवंत कौर ने बताया कि इस रोग को हीमोफीलिया ए तथा हीमोफीलिया बी दो वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। लगभग 80 प्रतिशत हीमोफीलिया रोगी, हीमोफीलिया ए से पीड़ित होते हैं। सामान्य हीमोफीलिया के मामले में पीड़ित को कभी-कभी रक्तस्राव होता है, जबकि स्थिति गंभीर होने पर अचानक व लगातार रक्तस्त्राव हो सकता है।
इस रोग के इलाज के बारे में बताते अध्यापिका गुरप्रीत कौर ने कहा कि एक समय पर बेहद खतरनाक माने जाने वाले इस रोग से पीड़ित रोगी आज लगभग सामान्य उम्र तक जीवन जी सकते हैं, हालांकि अभी पूरी तरह से इस रोग का उपचार संभव नहीं हुआ है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा हीमोफीलिया के प्रभावी उपचार में काफी प्रभावी साबित हुई है। इस लेक्चर को सफल बनाने में अध्यापिका मंजू बाला, दलजीत कौर, अध्यापक जतिन रेहान तथा गुरसेवक सिंह ने खास सहयोग दिया।
आयोजन
सेंट सोल्जर में हीमोफीलिया रोग पर विशेष लेक्चर करवाया
हीमोफीलिया दिवस पर विशेष लेक्चर में छात्रों को संबोधित करती अध्यापिका।