पंचायत समिति कर्मचारियों ने की हड़ताल
पंचायत समिति व जिला परिषद कर्मचारी एसोसिएशन पंजाब की ओर से मीटिंग कर फैसला किया गया कि पंजाब सरकार ने पंजाब पंचायत राज्य एक्ट 1994 लागू करने के उपरांत साल 1995 केडर के सेवा संबंधी अधिकार अपने पास रखे हुए हैं।
इसलिए कर्मचारियों को सेवा संबंधी आ रही मुश्किलों के बारे में डिप्टी कमिश्नर तरनतारन को मांग पत्र सौंपा। कलम छोड़ हड़ताल के दौरान यूनियन के नेताओं ने कहा कि इस बाबत 8 फरवरी 2018 को मुख्यमंत्री पंजाब के साथ हुई मीटिंग में भी मांगों को पूरा करने का वादा किया गया था लेकिन बड़े दुख की बात है कि 2 महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया जिससे कर्मचारियों में रोष पाया जा रहा है। इस रोष के तहत 27 मार्च को विकास भवन मोहाली में धरना भी दिया गया था। इस धरने पहुंचे कर्मचारियों ने मांग की कि पंचायत समिती व जिला परिषद के कर्मचारियों के वेतन खजाना दफ्तर के माध्यम से जारी किया जाए, सीपीएफ तुरंत जारी किया जाए। पंचायत अधिकारियों व सुपरिंटेंडेंटों की बीडीपीओ के पद पर पदोन्नति करने संबंधी मंजूरी के आधार पर नियम बनाए जाएं व सैद्घांतिक मंजूरी के आधार पर बीडीपीओ के पद का अतिरिक्त चार्ज दिया जाए, ग्रामीण विकास व पंचायत मंत्री के साथ हुई मीटिंग में लिए गए फैसलों के अनुसार पंचायत समिती व जिला परिषद के सभी खातों में बीडीपीओ के हस्ताक्षरों के साथ पंचायत अधिकारी/सुपरिंटेंडेंट को संयुक्त अपडेट करने के लिए पंचायत समिती का प्रस्ताव अनिवार्य करने का पत्र जारी किया जाए।
मांगों को लेकर कलम छोड़ हड़ताल करते पंचायत समिति व जिला परिषद कर्मचारी।