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डैपो प्रोग्राम की शुरुआत जोर-शोर से, पर तरनतारन में बाकी विकास के हालात पहले से कहीं ज्यादा बदतर
अश्विनी कुमार कुक्कू, हरि कृष्ण लाल अरोड़ा और ब्रिकमजीत सिंह साहिल।
भास्कर न्यूज | तरनतारन
नशे के खात्मे के लिए कराए जाने वाले डैपो प्रोग्राम के वीरवार को होने वाले दूसरे पड़ाव को लेकर जहां कांग्रेसी वर्करों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बाबत शहरवासी अश्विनी कुमार कुक्कू, हर कृष्ण लाल अरोड़ा, ब्रिकमजीत सिंह साहिल आदि का कहना है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नशों को खत्म करने के लिए डैपो के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के लिए जो राज्य स्तरीय समागम के माध्यम से मुहिम आरंभ की जा रही है वह प्रशंसनीय है। उन्हें आशा है कि आने वाले समय में मुश्किलों का समाधान हो सकेगा। लोगों में उत्साह इसलिए भी है क्योंकि कैप्टन 12 वर्षों के बाद मुख्यमंत्री के रूप में तरनतारन आएंगे। गौरतलब हो कि वर्ष 2006 में पंजाब में कैप्टन अमरेन्द्र सिंह सीएम थे, जिन्होंने श्री गुरु अर्जुन देव जी के 300 साला शहीदी दिवस समागम के मौके पर जून महीने में तरनतारन को जिला घोषित किया था। इसी समागम के चलते देश के तत्कालीन डा. मनमोहन सिंह भी जिले के गांव कक्का कंडियाला में कांग्रेसियों के वर्करों के रूबरू होने आए थे। उस समय यह पंजाब का19वां जिला बना था। उस समय से लेकर आज तक जिले में कई बदलाव हुए।
श्री गोइंदवाल साहिब की न्यूक्लियस इंडस्ट्री भी हुई बंद
श्री गोइंदवाल साहब की इंडस्ट्री को दुनिया के नक्शे पर सबसे बड़ा न्यूक्लियस इंडस्ट्री उद्योग बनाने के सपने को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वर्ष 1986 में इसका नींव पत्थर रखा था। लेकिन अफसोस आतंकवाद के काले दौर का साया श्री गोइंदवाल साहब की इंडस्ट्री पर इस कदर पड़ा कि दुनिया के नक्शे में अपनी छाप छोड़ने वाली यह न्यूक्लियस इंडस्ट्री आतंकवाद की भेंट चढ़ गई। जिसकी समय-समय की सरकारों ने कोई सार नहीं ली। व्यापारी चंदर कुमार, हरदेव सिंह, सुरजीत सिंह ने दैनिक भास्कर को बताया कि कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुई यह इंडस्ट्री अब भी सुरजीत होने के तरस रही है। राज्य में कांग्रेस की सरकार होने पर भी सरकार इसको सुरजीत करने के लिए गंभीर दिखाई नहीं दे रही है।
तरनतारन के सिविल अस्पताल की इमारत साबित हो रही सफेद हाथी
तरनतारन सिविल अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आए मरीज हरकंवल सिंह, प्रीत सिंह, गुरइकबाल सिंह, वरुण, नकुल व दिलप्रीत सिंह ने बताया कि वर्ष 2013 में मरीजों की सुविधाओं के लिए साढे़ 8 करोड़ रुपये की लागत से 100 बेड़ों वाली आलीशान ईमारत का निर्माण अकाली दल के कार्यकाल में सेहत मंत्री रहे मदन मोहन मित्तल द्वारा किया गया था। आज यह अस्पताल 23 डाक्टरों, 16 स्टाफ नर्सों व 21 दर्जा चार कर्मचारियों की कमियों से जूझ रहा है। कांग्रेस सरकार जोकि लोगों को सेहत सुविधाएं देने का वादा कर सत्ता में आई थी आज उसी के कार्यकाल में भी यह अस्पताल पहले दो अधिक सुविधाओं से वंचित है। अस्पताल में न तो वेंटीलेटर है और न ही ईसीजी की सुविधा, जिससे मरीज परेशान हो रहे हैं।
अध्यापकों की कमी के कारण गांव रत्तोके के मैट्रिक के 33 के 33 विद्यार्थी हुए फेल
शिक्षा की बात की जाए तो तरनतारन के सीमावर्ती कस्बा खेकरण के गांव रत्तोके गुरुद्वारा में सरकारी हाई स्कूल में स्टाफ की कुल 18 पोस्टें है जिनमें से यहां केवल 3 अध्यापक ही मौजूद हैं। इनमें से एक अध्यापक द्वारा ड्यूटी एडजस्टमेंट पर मेहंदीपुर भी ड्यूटी दी जाती है। गांव रत्तोके के सरपंच सुखजिंदर सिंह, रत्तोके हवेलियां के सरपंच जरनैल सिंह ने बताया कि स्टाफ की कमी होने के कारण इस स्कूल के मैट्रिक के 33 विद्यार्थियों में से एक भी विद्यार्थी पास नहीं हुआ है। इसके अलावा गांव रोजोके का सरकारी हाई स्कूल भी एक टीचर मनजीत सिंह के सहारे ही चल रहा है। जबकि गुरिंदरजीत सिंह जूनियर सहायक व एक चपड़ासी स्कूल में तैनात है। स्कूल में करीब 150 विद्यार्थी हैं। अध्यापकों की कमी के कारण इस स्कूल में भी दसवीं कक्षा के 22 विद्यार्थियों में से केवल एक ही पासं हुआ है। इसी तरह गांव भूरा कोहना के सरकारी हाई स्कूल में भी दसवीं कक्षा के 37 विद्यार्थियों में से कोई भी विद्यार्थी पास नहीं हुआ है।
साल 2005 से बंद पड़ी है शेरों मिल
किसान संघर्ष कमेटी के राज्य उपाध्यक्ष जसबीर सिंह पिद्दी ने बताया कि किसानों की आमदन का एकमात्र सहारा तरनतारन के गांव शेरोंं में वर्ष 1975 को शुरु हुई शेरो मिल वर्ष 2005 में पूरी तरह से बंद हो चुकी थी। इस मिल के शुरू होने से किसानों को गन्ने की फसल की रोपाई से काफी लाभ होता था लेकिन इसके बंद हो जाने के बाद किसानों की आर्थिकता इस कदर बिगड़ी कि दोबारा किसी भी सरकार ने उन्हें रोजगार मुहैया करवाने के लिए इसे पूर्ण चालू करवाने की ओर ध्यान केन्द्रित नहीं किया। यह मिल सियासी पार्टिंयों की भेंट चढती गई व अब यह पूरी तरह से खंडर बन चुकी है।