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मां के गर्भ में सामान्य थे, बाद में विशेष महापुरुष बन गए गुरुदेव : साध्वीश्री

3 वर्ष पहले
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गुरुदेव सौभाग्यमलजी सबके सरछत्र थे। जो धर्म की प्रभावना विशिष्ट करते हैं वे धर्म प्रभावक कहलाते हैं। ऐसे ही धर्म प्रभावक थे मालव केसरी। गुणियों के गुणानुवाद किए जाते है एवं गुण ग्रहण करने की हमारी बुद्धि होनी चाहिए, तभी हम गुण ग्रहण कर सकते हैं।

यह बात साध्वीश्री निखिलशिलाजी ने कही। वे मालव केसरी गुरुदेव सौभाग्यमलजी की 34वीं पुण्यतिथि पर पौषध भवन में आयोजित धर्मसभा में बोल रही थी। साध्वीश्री ने कहा गुरुदेव मां के गर्भ में सामान्य थे, बाद में वे विशेष महापुरुष बन गए। वे धूल में पड़े हुए कंकर के समान थे। वे गुरुदेव नंदलालजी के सान्निध्य में आए तो पूज्य गुरुदेव ने उन्हें कंकर से शंकर बना दिया। उनमें माधुर्य का विशिष्ट गुण था। हर कोई उनसे प्रभावित हो जाता था। उनका प्रसन्न मुखमंडल था। वे सबके वंदनीय थे। साध्वीश्री ने बताया उनमें कलह मिटाने का विशेष दक्षता गुण था। उन्होंने कई संघों के झगड़े मिटाकर एकता स्थापित की। उनके व्याख्यानों से प्रभावित होकर कई राजा महाराजा व नरेशों ने व्यसनों को त्याग दिया। वे परम गुरुभक्त थे। सभा में साध्वी प्रियशिलाजी ने कहा गुरुदेव स्वाध्यायी प्रेमी थे। प्रतिदिन वे दशवेंकालिक और नंदीसूत्र का स्वाध्याय करते थेे। उनकी वाणी बहुत मधुर थी, वे वाणी के जादूगर थे। सभा का संचालन श्रीसंघ के सचिव प्रदीप गादिया ने किया। सभा में सौभाग्यमलजी की पुण्यतिथि के प्रसंग पर उनके गुणों पर आधारित प्रश्न मंच का आयोजन हुआ। जिसका संचालन धर्मदास जैन स्वाध्यायी संघ के युवा स्वाध्यायी वीरेंद्र मेहता ने किया। श्रीसंघ की ओर से पुरस्कार दिए गए। पुण्यतिथि के प्रसंग पर 140 श्रावक- श्राविकाओं ने सामूहिक एकासन तप की तपस्या की। एकासने का सामूहिक आयोजन स्थानीय महावीर भवन पर हुआ।

प्रत्याख्यान ग्रहण किए

श्रीसंघ के अध्यक्ष जितेन्द्र घोड़ावत ने बताया धर्मसभा में रवि प्रकाशचंद्र गादिया ने छह उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। कई श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास, आयंबिल, नीवीं, एकासन, बियासन आदि विविध तप के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। रीता सुभाष बोथरा धर्मचक्र व मधु जयंतीलाल तलेरा और सरोज अशोक तलेरा चार-चार के पारणे की तपस्या कर रहे है।

घर में महापुरुषों के चित्र लगाओ, बुद्धि विकसित होगी

मेघनगर |सफलता प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ जरूरी है, सिद्धि को प्राप्त करना है तो आराधना में पूर्ण पुरुषार्थ करना होगा। पुरुषार्थ द्वारा कर्मों का हिस्सा होता है क्रोध करने वाला जीव विनय प्राप्त नहीं कर सकता। यह प्रेरणादायी बात श्री राजेंद्रसूरी जैन मंदिर में साध्वीश्री अनेकांतलता श्रीजी ने कही। उन्होंने बताया शक्ति प्राप्ति के लिए देवगुरु और धर्म पर पूर्ण श्रद्धा रखनी होगी। तभी सम्यक की प्राप्ति होगी। उन्होंने कहा शरीर को खिला खिला कर बढ़ाएंगे तो बीमारियों से ग्रसित हो जाएंगे। शरीर में श्रम निकालना जरूरी है, आज घर-घर दवाइयों के डिब्बे मिलेंगे। टीवी, फ्रिज, एसी, वाशिंग मशीन सभी भौतिक सुख सुविधाओं की वस्तुओं से दु:ख ही दु:ख है। साध्वीश्री ने कहा घरों में परमात्मा एवं महापुरुषों के चित्र लगाओ इससे देखकर मन को शांति मिलेगी और बुद्धि विकसित होगी। परिवारजन बच्चों को स्कूल भेजने में स्फूर्ति दिखाते हैं लेकिन परमात्मा की पूजा एवं धार्मिक पाठशाला भेजने में पीछे क्यों है। बच्चों का बचपन सुधर जाएगा तो उनका जीवन सुधर जाएगा। आयंबिल तप एवं प्रभावना का लाभ कवींद्र कुमार चोरड़िया परिवार ने लिया। संचालन राकेश लोढ़ा ने किया।

प्रवचन के बाद समाजजनों ने समाज के वरिष्ठों का अशीर्वाद लिया।

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