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10 साल बाद टिब्बी को मिली दमकल, स्थायी के लिए प्रस्ताव भेजा

3 वर्ष पहले
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18 दिन तक धरना, पोस्टकार्ड अभियान आखिरकार रंग लाया और टिब्बी को अस्थाई तौर पर दो माह के लिए दमकल नसीब हुई। किसानों के दबाव के बाद प्रशासन झुका और किसान भी खुश हुए। इससे पहले भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में उपखंड मुख्यालय पर दमकल की मांग को लेकर बेमियादी धरना शुक्रवार को भी जारी रहा।

किसानों ने एसडीएम कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी तो प्रशासन ने किसानों के साथ वार्ता की। इसमें स्थाई रूप से दमकल के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने तथा अस्थाई रूप से दो माह के लिए टिब्बी में दमकल के ठहराव करने की बात स्वीकारने पर किसानों ने धरना समाप्त किया। बड़ी संख्या में किसानों ने उपखंड मुख्यालय के आगे सभा कर रोष प्रदर्शन किया। नाराजगी देख किसानों के प्रतिनिधिमंडल की एसडीएम उम्मेद सिंह र|ू, तहसीलदार उमा मित्तल, डीएसपी देवानंद और सीई सुभाषचंद्र कच्छावा के साथ वार्ता हुई। घेराव की चेतावनी के मध्यनजर डीएसपी देवानंद और टिब्बी सीआई सुभाष चंद्र कच्छावा के नेतृत्व में भारी पुलिस जाप्ता मौके पर तैनात रहा। इस मौके पर भाकिसं के जिलाध्यक्ष चरण सिंह सिद्धू, तहसील अध्यक्ष कुलवंत सुथार, वृक्षमित्र साहबराम बिश्नोई, गुरदीप शाहपीनी, हरदीप सिंह, सुधीर गोदारा आदि मौजूद थे।

किसानों ने 27 मार्च से बेमियादी धरना शुरू किया। भास्कर ने जब इस मुद्दे को उठाया तो सांसद निहालचंद मेघवाल ने 20लाख रुपए की अनुशंसा का पत्र कलेक्टर को लिखा। इसके बाद किसानों ने पोस्टकार्ड अभियान चलाया और धरने पर डटे रहे। विभिन्न तहसीलों पर भी प्रदर्शन हुए।

आवाज उठी तो इलाके के किसान हुए एकजुट, अब आगजनी के समय बाहर से नहीं बुलानी पड़ेगी दमकल

भास्कर ने उठाया किसानों का दर्द तो एक दशक पुरानी समस्या हुई हल
दमकल के अभाव में एक दशक से खाक हो रही फसलों का मुद्दा भास्कर ने उठाया। इसके बाद कई संगठन और संस्थाएं एकजुट हुई और आज टिब्बी को खुद की दमकल नसीब हुई है। किसानों ने भास्कर के अभियान को भी सराहा।

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