• Hindi News
  • National
  • बुंदेलखंड की प्रथम प्रतिभा स्थली पपौरा जी में शुरू आचार्यश्री बोले अभिभावकों के त्याग से हुआ संभव

बुंदेलखंड की प्रथम प्रतिभा स्थली पपौरा जी में शुरू आचार्यश्री बोले-अभिभावकों के त्याग से हुआ संभव

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
देश की पांचवी और बंुदेलखंड की पहली प्रतिभा स्थली का पपौराजी में सोमवार को शुभारंभ किया गया। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के सानिध्य में सोमवार से ही कक्षाओं को प्रारंभ कराया गया।

दोपहर 3 बजे से आयोजन की शुरूआत करते हुए सरस्वती माता की पूजा बच्चियों द्वारा की गई। ब्रह्मचारी दीदी ने कहा कि स्कूलों में सिर्फ अंक लाने पर जोर दिया जाता है। न कि संस्कार प्रदान करने में, जब संस्कार ही नहीं होंगे तो उन पुस्तकों की भाषा का पढ़ने क्या मतलत रहेगा। इसके लिए आचार्यश्री द्वारा प्रतिभा स्थली खोलने का निर्णय लिया गया। सुबह से ही आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कक्षों में जाकर भ्रमण किया गया। कक्षों को परखकर उन्होंने व्यवस्थापिकों को कार्य सौंप दिया। दोपहर में 3 बजे आयोजन की शुरूआत की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री वीरेंद्र खटीक, पूर्व नपा अध्यक्ष राकेश गिरी और राजेंद्र तिवारी ने अाचार्यश्री विद्यासागर महाराज को श्रीफल भेटकर दर्शन किए। प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा कि प्रतिभास्थली के माध्यम से एक कदम आगे बढ़ गया है। छोटी-छोटी प्रतिभाओं को निखारने की विद्या यहां भी दी जाएगी। यह सब अभिभावकों के त्याग से संभव हो सका है। आचार्यश्री का संग आया है। छोटे-छोटे बच्चे कहते हैं। महाराज जी यहीं रहो यही चतुर्मास करो, आचार्य श्री ने कहा हमारी पाठशाला एक स्थान पर नहीं चल सकती। हमने आप का कार्य शुरू करा दिया है। पपौराजी प्रबंधन ने कठिन परिश्रम करके सिर्फ डेढ़ महीने में प्रतिभास्थली का स्वरुप आपके सामने खड़ा कर दिया है।

प्रतिभास्थली का अपना स्वरूप होता है। कुछ बातें आपको यहां मिलेगी अनंत कहीं नहीं मिलेगी। छोटी- छोटी बालिकाओं का भाग बहुत तेज है। यहां शिक्षकों की कमी नहीं होगी। कुछ लोगों ने कहा आपके यहां शिक्षिकाएं ज्यादा और छात्राएं कम हो जाती हैं। आचार्य जी ने कहा हम तो शिक्षिकाओं को ज्यादा संख्या में रखेंगे। पढ़ाई में कोई बाधा उत्पन्न नहीं हो। जिससे बच्चियों का शिक्षण कार्य निर्बाध रुप से चलता रहे। हथकरघा के कार्यक्रम को प्रतिभास्थली के पाठ्यक्रम में भी स्थान दिया गया है। जिसके द्वारा बच्चों को हथकरघा के बारे में जानकारी मिल सके। सुनील भैयाजी ने बताया कि आज श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर दीपक भैया अमरकंटक ने सात प्रतिमाओं को धारण किया है। पहले वह तीन प्रतिमधारी थे। पपौराजी प्रबंध कार्यकारिणी कमेटी अध्यक्ष कोमलचंद सुनवाहा, मंत्री विजय तेवरैया, उपमंत्री विनय सुनवाहा, अनिल धनगौल, सहित सैकड़ों लोगों ने आचार्य के समक्ष पपौराजी में चतुर्मास करने का निवेदन किया।

हथकरघा से लोगों काे मिलेगा रोजगार

आज अतिशय क्षेत्र पपौरा में स्वर्णिम इतिहास लिखने जा रहा है अनुज जैन ने बताया कि श्रुत पंचमी के पावन दिवस पर आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में सुबह 6:15 बजे आचार्यश्री ने दयोदय गौशाला पहुंचकर हथकरघा केंद्र का हजारों लोगों के साथ उद्घाटन किया। आज से टीकमगढ़ जिले का नाम हथकरघा केंद्रों में लिखा जाएगा। आचार्यश्री ने कहा कि हथकरघा के माध्यम से सैकड़ों बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। साथ ही सूत के माध्यम से हथकरघा से स्वदेशी वस्त्रों का निर्माण होगा। ऐसा आचार्य के पपौरा आने के पूर्व ही 108 हथकरघा की घोषणा टीकमगढ़ समाज एवं पपौरा कमेटी के द्वारा आचार्यश्री के समक्ष डिंडोरी में ही कर दी गई थी।

आचार्यश्री ने कक्षों का किया निरीक्षण
ब्रह्मचारी दीदी 108 बच्चियों को देगी शिक्षा

प्रदेश भर से बच्चियों का रजिस्ट्रेशन होने के बाद रविवार को पपौराजी पहुंची। जहां उनकी शिक्षा से लेकर रहन-सहन कार्य कार्य यहीं रहकर होगा। प्रतिभा स्थली के निर्माण होने तक बच्चियों की शिक्षा के लिए अन्य स्थान सुनिश्चित किया गया। यहां 4वीं कक्षा से 6 वीं तक शिक्षा प्रारंभ कर दी गई। 90 ब्रह्मचारी दीदी को शिक्षा लेकर उनकी देखरेख की व्यवस्था सौंपी गई।

भास्कर संवाददाता | टीकमगढ़

देश की पांचवी और बंुदेलखंड की पहली प्रतिभा स्थली का पपौराजी में सोमवार को शुभारंभ किया गया। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के सानिध्य में सोमवार से ही कक्षाओं को प्रारंभ कराया गया।

दोपहर 3 बजे से आयोजन की शुरूआत करते हुए सरस्वती माता की पूजा बच्चियों द्वारा की गई। ब्रह्मचारी दीदी ने कहा कि स्कूलों में सिर्फ अंक लाने पर जोर दिया जाता है। न कि संस्कार प्रदान करने में, जब संस्कार ही नहीं होंगे तो उन पुस्तकों की भाषा का पढ़ने क्या मतलत रहेगा। इसके लिए आचार्यश्री द्वारा प्रतिभा स्थली खोलने का निर्णय लिया गया। सुबह से ही आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कक्षों में जाकर भ्रमण किया गया। कक्षों को परखकर उन्होंने व्यवस्थापिकों को कार्य सौंप दिया। दोपहर में 3 बजे आयोजन की शुरूआत की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री वीरेंद्र खटीक, पूर्व नपा अध्यक्ष राकेश गिरी और राजेंद्र तिवारी ने अाचार्यश्री विद्यासागर महाराज को श्रीफल भेटकर दर्शन किए। प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा कि प्रतिभास्थली के माध्यम से एक कदम आगे बढ़ गया है। छोटी-छोटी प्रतिभाओं को निखारने की विद्या यहां भी दी जाएगी। यह सब अभिभावकों के त्याग से संभव हो सका है। आचार्यश्री का संग आया है। छोटे-छोटे बच्चे कहते हैं। महाराज जी यहीं रहो यही चतुर्मास करो, आचार्य श्री ने कहा हमारी पाठशाला एक स्थान पर नहीं चल सकती। हमने आप का कार्य शुरू करा दिया है। पपौराजी प्रबंधन ने कठिन परिश्रम करके सिर्फ डेढ़ महीने में प्रतिभास्थली का स्वरुप आपके सामने खड़ा कर दिया है।

प्रतिभास्थली का अपना स्वरूप होता है। कुछ बातें आपको यहां मिलेगी अनंत कहीं नहीं मिलेगी। छोटी- छोटी बालिकाओं का भाग बहुत तेज है। यहां शिक्षकों की कमी नहीं होगी। कुछ लोगों ने कहा आपके यहां शिक्षिकाएं ज्यादा और छात्राएं कम हो जाती हैं। आचार्य जी ने कहा हम तो शिक्षिकाओं को ज्यादा संख्या में रखेंगे। पढ़ाई में कोई बाधा उत्पन्न नहीं हो। जिससे बच्चियों का शिक्षण कार्य निर्बाध रुप से चलता रहे। हथकरघा के कार्यक्रम को प्रतिभास्थली के पाठ्यक्रम में भी स्थान दिया गया है। जिसके द्वारा बच्चों को हथकरघा के बारे में जानकारी मिल सके। सुनील भैयाजी ने बताया कि आज श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर दीपक भैया अमरकंटक ने सात प्रतिमाओं को धारण किया है। पहले वह तीन प्रतिमधारी थे। पपौराजी प्रबंध कार्यकारिणी कमेटी अध्यक्ष कोमलचंद सुनवाहा, मंत्री विजय तेवरैया, उपमंत्री विनय सुनवाहा, अनिल धनगौल, सहित सैकड़ों लोगों ने आचार्य के समक्ष पपौराजी में चतुर्मास करने का निवेदन किया।

हथकरघा से लोगों काे मिलेगा रोजगार

आज अतिशय क्षेत्र पपौरा में स्वर्णिम इतिहास लिखने जा रहा है अनुज जैन ने बताया कि श्रुत पंचमी के पावन दिवस पर आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में सुबह 6:15 बजे आचार्यश्री ने दयोदय गौशाला पहुंचकर हथकरघा केंद्र का हजारों लोगों के साथ उद्घाटन किया। आज से टीकमगढ़ जिले का नाम हथकरघा केंद्रों में लिखा जाएगा। आचार्यश्री ने कहा कि हथकरघा के माध्यम से सैकड़ों बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। साथ ही सूत के माध्यम से हथकरघा से स्वदेशी वस्त्रों का निर्माण होगा। ऐसा आचार्य के पपौरा आने के पूर्व ही 108 हथकरघा की घोषणा टीकमगढ़ समाज एवं पपौरा कमेटी के द्वारा आचार्यश्री के समक्ष डिंडोरी में ही कर दी गई थी।

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ जो बुंदेलखंड की प्रथम प्रतिभास्थली का सौभाग्य टीकमगढ़ के अतिशय क्षेत्र पपौरा जी को मिली। सैकड़ों ब्रहमचारी बहनों के साथ प्रतिभास्थली स्थल पर पहुंचे। प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि आचार्यश्री ने प्रतिभास्थली के प्रत्येक कक्ष में जाकर निरीक्षण किया आज ज्ञानोदय विद्यापीठ के शुभारंभ के साथ ही 18-2019 का शिक्षण सत्र आज श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर शुरू किया गया। श्रुत पंचमी पर जिनवाणी माता सरस्वती माता एवं शास्त्रों की पूजा की जाती है।

खबरें और भी हैं...