भास्कर संवाददाता |सोडलपुर/टिमरनी
क्षेत्र में पिछले दो साल से रियल स्टेट के कारोबार में मंदी है। इस कारण दामों में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। कुछेक गांवों में आंशिक वृद्धि हुई है। इसके बावजूद किसानों को खेती की जमीन के भाव से दोगुना से अधिक स्टांप ड्यूटी देना पड़ रही है। औसतन 6-7 लाख रुपए एकड़ जमीन के दाम चल रहे हैं, लेकिन गाइड लाइन के मुताबिक 12 से 16 लाख रुपए एकड़ तक खेती की जमीन खरीदने पर किसानों को स्टांप ड्यूटी देना पड़ रही है। गाइड लाइन के अनुसार दर अधिक होने की वजह से यह स्थिति बनी है।
जानकारी के मुताबिक दो साल पहले तक क्षेत्र में जमीन के दाम आसमान पर थे, लेकिन इसके बाद जमीन के दाम नीचे आ गए। लेकिन गाइड लाइन में रजिस्ट्री शुल्क में सुधार नहीं हो सका। जमीन खरीदने वालों को पुरानी दर से स्टांप शुल्क का भुगतान करना पड़ रहा है। जिससे किसान परेशान हैं। एक ओर जहां बेचने वाला किसान भाव कम होने से परेशान है तो वहीं दूसरी और खरीदने वाला किसान भी रजिस्ट्री शुल्क अधिक लगने से दिक्कत में है। शासन ने जो गाइडलाइन रजिस्ट्री तय कर रखी है उसी आधार पर रजिस्ट्रियां हो रही हैं, लेकिन वर्तमान में वहां जमीनें बहुत ही कम दामों पर बिक रही हैं। ऐसे में किसान संगठन व किसान यूनियन के पदाधिकारी भी इस बड़े मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। दो साल पहले तक जिस जमीन के भाव 12 से 15 लाख रुपए प्रति एकड़ थे उस जमीन के भाव गिर कर अब 6 से 7 लाख रुपए प्रति एकड़ हो गए हैं। फिर भी रजिस्ट्री शुल्क पुरानी दर पर वसूला जा रहा है। वहीं खरीददारों को दोगुना रजिस्ट्री शुल्क की वजह समझ नहीं आ रही है।