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जटिल नियमों में अटका कृषि उपज (गौण) मंडी निर्माण कार्य

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | गुढ़ाचंद्रजी(हिंडौन सिटी)

कृषि विभाग द्वारा कस्बे में चार वर्ष पूर्व स्वीकृत कृषि गौण मंडी का निर्माण कार्य विभाग के जटिल नियमों के कारण अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। कृषि गौण मंडी के अभाव में क्षेत्र के किसानों को अपनी फसल दलालों को बेचनी पड़ रही है जिससे दलाल मोटा मुनाफा कमा रहे हैं तथा किसानों को उनकी मेहनत का फल नहीं मल पा रहा है। क्षेत्र के किसानों ने मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री को पत्र भेज कर मंडी में दुकान निर्माण सहित अन्य कार्य शुरू कराए जाने की मांग की है।

किसानों ने बताया कि छ: वर्ष पूर्व कृषि विभाग द्वारा कस्बे में कृषि गौण मंडी निर्माण की स्वीकृति दी गई। मंडी निर्माण के लिए राजस्व विभाग ने गुढ़ाचंद्रजी-दलपुरा मार्ग पर मांचड़ी गांव के पास 35 बीघा 8 बिस्वा जमीन मंडी के लिए आवंटित कर दी। आवंटित जमीन पर कृषि उपज मंडी समिति हिंडौन सिटी द्वारा साफ सफाई करा कर तार बंदी भी करा दी। तार बंदी के तीन वर्ष बाद विभाग के जटिल नियमों के कारण मंडी में दुकान निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जिससे किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। किसान रूप सिंह आमलीपुरा, माधो सिंह राजाहेड़ा, बाबू लाल शर्मा रघुनाथपुरा, श्योराज सिंह तालचिड़ा, मोहर सिंह गुर्जर मांचड़ी, मान सिंह मालूपाड़ा ने बताया कि मंडी के अभाव में क्षेत्र के किसानों को 40 किलोमीटर दूर गंगापुर सिटी व टोडाभीम मंडियों में ले जाकर अपनी फसल बेचनी पड़ती है। क्षेत्र से मंडियों की दूरी अधिक होने से फसलों को मंडियों में पहुंचाने में किसानों खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

माड़ क्षेत्र होने से क्षेत्र में सरसों के रूप में काला सोना सहित चना, बाजरा, गेहूं , तिल्ली की बंपर पैदावार होती है लेकिन मंडी के अभाव में किसानों को अपनी फसलें दलालों को बेचनी पड़ती है। क्षेत्र के किसानों ने मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री को पत्र भेज कर मांचड़ी गांव में आवंटित मंडी में दुकान निर्माण कार्य शुरू कराए जाने की मांग की है।

नक्शे के अभाव में अटका निर्माण कार्य

हिंडौन सिटी कृषि उपज मंडी अध्यक्ष ने बताया कि चार वर्ष पूर्व गुढ़ाचंद्रजी कस्बे में कृषि गौण मंडी की स्वीकृति मिली थी। राजस्व विभाग द्वारा मंडी निर्माण के लिए आवंटित भूमि की तारबंदी भी करा दी गई है। कृषि विभाग द्वारा मंडी में दुकानों के लिए कम से कम 30 लाइसेंस धारी व्यापारी के आवेदन, व्यापार करने का लाइसेंस, कम से कम तीन वर्ष का टर्नओवर जैसे जटिल नियमों के चलते मंडी में दुकानों का नक्शा पास नहीं हो पाया है। क्षेत्र में मात्र दो व्यापारी ही लाइसेंस धारियों ने दुकान आवंटन के लिए आवेदन कर रखा है। समुचित आवेदनों के अभाव में मंडी का नक्शा पास नहीं हो पा रहा है, जिससे मंडी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। दुकानों का नक्शा पास होते तथा उच्च अधिकारियों के निर्देश आते ही मंडी कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

स्वीकृति के लिए नियमों में हो संशोधन

कृषि उपज मंडी हिंडौन सिटी के सचिव ने बताया कि मंडी में दुकान आवंटन के लिए गुढ़ाचंद्रजी में शीघ्र ही शिविर आयोजित किया जाएगा। विभाग द्वारा दुकान निर्माण की स्वीकृति मिलते ही मंडी निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। कृषि उपज मंडी के पूर्व सदस्य दीपेंद्र सिंह राजावत ने बताया कि मंडी यार्ड में दुकान निर्माण के लिए जटिल नियमों के चलते दुकान निर्माण का नक्शा ही पास नहीं हो पाया है। दुकान निर्माण व आवंटन के नियमों में संशोधन के लिए क्षेत्र के किसानों द्वारा पुरजोर से मांग उठती रही है। सरकार यदि नियमों में संशोधन करे तो मंडी का निर्माण कार्य फिर से शुरू हो सकता है।

गुढाचन्द्रजी. नियमों में अटका कृषि उपज मंडी निर्माण कार्य।

भास्कर न्यूज | गुढ़ाचंद्रजी(हिंडौन सिटी)

कृषि विभाग द्वारा कस्बे में चार वर्ष पूर्व स्वीकृत कृषि गौण मंडी का निर्माण कार्य विभाग के जटिल नियमों के कारण अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। कृषि गौण मंडी के अभाव में क्षेत्र के किसानों को अपनी फसल दलालों को बेचनी पड़ रही है जिससे दलाल मोटा मुनाफा कमा रहे हैं तथा किसानों को उनकी मेहनत का फल नहीं मल पा रहा है। क्षेत्र के किसानों ने मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री को पत्र भेज कर मंडी में दुकान निर्माण सहित अन्य कार्य शुरू कराए जाने की मांग की है।

किसानों ने बताया कि छ: वर्ष पूर्व कृषि विभाग द्वारा कस्बे में कृषि गौण मंडी निर्माण की स्वीकृति दी गई। मंडी निर्माण के लिए राजस्व विभाग ने गुढ़ाचंद्रजी-दलपुरा मार्ग पर मांचड़ी गांव के पास 35 बीघा 8 बिस्वा जमीन मंडी के लिए आवंटित कर दी। आवंटित जमीन पर कृषि उपज मंडी समिति हिंडौन सिटी द्वारा साफ सफाई करा कर तार बंदी भी करा दी। तार बंदी के तीन वर्ष बाद विभाग के जटिल नियमों के कारण मंडी में दुकान निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जिससे किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। किसान रूप सिंह आमलीपुरा, माधो सिंह राजाहेड़ा, बाबू लाल शर्मा रघुनाथपुरा, श्योराज सिंह तालचिड़ा, मोहर सिंह गुर्जर मांचड़ी, मान सिंह मालूपाड़ा ने बताया कि मंडी के अभाव में क्षेत्र के किसानों को 40 किलोमीटर दूर गंगापुर सिटी व टोडाभीम मंडियों में ले जाकर अपनी फसल बेचनी पड़ती है। क्षेत्र से मंडियों की दूरी अधिक होने से फसलों को मंडियों में पहुंचाने में किसानों खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

माड़ क्षेत्र होने से क्षेत्र में सरसों के रूप में काला सोना सहित चना, बाजरा, गेहूं , तिल्ली की बंपर पैदावार होती है लेकिन मंडी के अभाव में किसानों को अपनी फसलें दलालों को बेचनी पड़ती है। क्षेत्र के किसानों ने मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री को पत्र भेज कर मांचड़ी गांव में आवंटित मंडी में दुकान निर्माण कार्य शुरू कराए जाने की मांग की है।

नक्शे के अभाव में अटका निर्माण कार्य

हिंडौन सिटी कृषि उपज मंडी अध्यक्ष ने बताया कि चार वर्ष पूर्व गुढ़ाचंद्रजी कस्बे में कृषि गौण मंडी की स्वीकृति मिली थी। राजस्व विभाग द्वारा मंडी निर्माण के लिए आवंटित भूमि की तारबंदी भी करा दी गई है। कृषि विभाग द्वारा मंडी में दुकानों के लिए कम से कम 30 लाइसेंस धारी व्यापारी के आवेदन, व्यापार करने का लाइसेंस, कम से कम तीन वर्ष का टर्नओवर जैसे जटिल नियमों के चलते मंडी में दुकानों का नक्शा पास नहीं हो पाया है। क्षेत्र में मात्र दो व्यापारी ही लाइसेंस धारियों ने दुकान आवंटन के लिए आवेदन कर रखा है। समुचित आवेदनों के अभाव में मंडी का नक्शा पास नहीं हो पा रहा है, जिससे मंडी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। दुकानों का नक्शा पास होते तथा उच्च अधिकारियों के निर्देश आते ही मंडी कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

स्वीकृति के लिए नियमों में हो संशोधन

कृषि उपज मंडी हिंडौन सिटी के सचिव ने बताया कि मंडी में दुकान आवंटन के लिए गुढ़ाचंद्रजी में शीघ्र ही शिविर आयोजित किया जाएगा। विभाग द्वारा दुकान निर्माण की स्वीकृति मिलते ही मंडी निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। कृषि उपज मंडी के पूर्व सदस्य दीपेंद्र सिंह राजावत ने बताया कि मंडी यार्ड में दुकान निर्माण के लिए जटिल नियमों के चलते दुकान निर्माण का नक्शा ही पास नहीं हो पाया है। दुकान निर्माण व आवंटन के नियमों में संशोधन के लिए क्षेत्र के किसानों द्वारा पुरजोर से मांग उठती रही है। सरकार यदि नियमों में संशोधन करे तो मंडी का निर्माण कार्य फिर से शुरू हो सकता है।

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