जैन धर्म की नीतियों एवं बुराइयों पर की चर्चा (टोंक)
जैन धर्म की नीतियों एवं बुराइयों पर की चर्चा (टोंक) मुनि धर्मचंद “पीयूष’ ने बुधवार को पन्नाधाय कालेज में अक्षय तृतीया के अवसर पर श्रद्धालुओं को आशिर्वाद दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जैन धर्म विभिन्न आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान, हवन, समाधि, योग जैसी साधना, तप, जप के साथ जीवन को सार्थक बनाने प्रयास करता है। भारतीय संस्कृति में अक्षय तृतीया का बहुत बड़ा महत्व है। जैन दर्शन में इसे स्मरण शक्ति के साथ युग का प्रारंभ माना जाता है। भाजयुमो जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान, शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष जसवंत सिंह नरुका, धनसिंह खरेड़ा, महेंद्र सिंह पंवार, शक्ति सिंह सोलंकी आदि मौजूद थे।