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चांद दिखाई देने पर आज से भी शुरू हो सकती है तरावीह की विशेष नमाज

3 वर्ष पहले
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जिलेभर में चांद दिखाई देने पर माहे रमजान गुरुवार से शुरु हो जाएगा। बुधवार को चांद दिखाई दिया, तो रमजान माह की पहली तरावीह की नमाज बुधवार को ही बाद नमाजे इशा होगी। चांद गुरुवार को दिखाई दिया तो माहे रमजान का पहला रोज़ा शुक्रवार को होगा। माहे रमजान की तैयारियां जिलेभर में शुरू हो गई है। लोगों ने रमजान में सहरी एवं इफ्तार समय के फोल्डर आदि छपवाकर वितरित करने शुरू कर दिए हैं। साथ ही मस्जिदों में भी इसके लिए विशेष तौर पर इंतजाम किए जा रहे हैं।

टोंक शहर के कई हाफिज देश के हिस्सों में तरावीह की नमाज अदा कराए जाने के लिए रवाना हो गए, तो कई बुधवार को रवाना होंगे। टोंक के हाफिज रमजान माह में तरावीह की नमाज अदा कराए जाने के लिए विदेशों तक जाते हैं। एक जमाने में टोंक का मुकाम देश भर में मज़हबी शिक्षा के एतेबार से अहम रहा है। हालांकि आज भी उसका अपना अलग ही मुकाम है। मुफ्ती आदिल नदवी ने बताया कि तकरीबन टोंक शहर में दो से ढाई हजार हाफिज होंगे। जिसमें से कई जिले के बाहर भी तरावीह की नमाज पढ़ाए जाने के लिए जाते हैं। वर्तमान में भी प्रतिवर्ष तकरीबन 50 तालिबे इल्म कुरआन हिफ्ज कर लेते हैं। रियासत काल में हाफिजों (कंठस्थ कुरआन पढने वाले) की तादाद इतनी हुआ करती थी कि हिंदुस्तान में टोंक का नाम सफे अव्वल में आया करता था। यहां के कई मदरसों में तो विदेशों तक से तालिबे इल्म दीनी तालीम के लिए आया करते थे। रियासत काल में मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र में हर तीन-चार घरों में से कम से कम एक हाफिज जरुर हुआ करता था। कई खानदानों एवं परिवारों में तो औरतों सहित घर के मर्द सभी हाफिज हुए। आज भी कई परिवारों में हाफिज बनने की रिवायत चली आ रही है।

जिले में तकरीबन 250 मस्जिदें हैं, जिसमें से अधिकांश में हाफिज रमजान माह में तरावीह की नमाज अदा कराते हैं। रियासत काल में भी करीब 180 मस्जिदें थी। यहां की मस्जिदों के अलावा हाफिज जिले, राज्य एवं राज्य के बाहर एवं विदेश तक में कुरआन सुनाने जाते हैं।

शहर के कई मदरसों में कुरआन हिफ्ज कराया जाता है। सात-आठ साल के तालिबे इल्म भी कुरआन कंठस्थ कर लिया करते हैं। लेकिन अधिकांश तय 12 से 15 साल के तालिबे इल्म कुरआन हिफ्ज करते हैं।

हाफिज उसे कहा जाता है, जो बिना देखे कुरआन की तिलावत कंठस्थ किया करते हैं। रमजान माह में तरावीह की नमाज पढाने वाले हािफज के द्वारा बिना देखे कुरआन की कंठस्थ तिलावत की जाती है।

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