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शहीद मोतीलाल की न प्रतिमा लगी, न ही स्कूल का नाम रखा गया

3 वर्ष पहले
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श्रीलंका में लिट्टे से हुई जंग में गोली खाकर शहीद हुए सेना के जवान व ग्राम पंचायत पोल्याडा के पोल्याडी गांव (देवपुरा) निवासी शहीद मोतीलाल मीणा के परिजनों को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा शहीदों के लिए संचालित योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं घोषणाओं के बावजूद पोल्याडा गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल का नाम भी शहीद मोतीलाल मीणा के नाम अब तक नहीं किया। ना ही उनकी प्रतिमा लगाई गई है। उनकी वीरांगना को विशेष पहचान पत्र भी नहीं दिया गया है। कुछ माह पूर्व सेनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजोर व अधिकारियों सहित शहीद मोतीलाल के घर जाकर उनकी वीरांगना इंद्रादेवी को सम्मानित किया।

यहां उनके परिवार को योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन भी दिया था। मगर अब तक कुछ भी नहीं हुआ। विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष रामनारायण मीणा का कहना है कि शहीद हुए जवान का बड़ा महत्व होता है। उसने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। ऐसे में सरकार का फर्ज बनता है कि वह शहीद के परिवार को सरकारी योजना का लाभ प्राथमिकता के साथ दिलाए।

मोतीलाल की स्कूली शिक्षा

देवली तहसील के पोल्याड़ी गांव निवासी 3 मार्च 1957 को मोती लाल मीणा का जन्म हुआ। पिता कालूराम व माता धापू देवी के तीन बेटों ये दूसरे नंबर के पुत्र थे। इनके एक बहन भी थी। मोती लाल का परिवार एक गरीब किसान परिवार था। अपनी पढ़ाई करने के लिए 5 किमी दूर जाकर तक पैदल जाता था। उन्होंने माध्यमिक स्कूल तक पढाई निवारिया में तथा उच्च माध्यमिक स्तर की देवली में की। हाईं स्कूल की पढाई पूरी करने के बाद बूंदी डिपो में रोडवेज परिचालक के पद पर कार्य किया। उनके दादा कालू राम मीणा भी आर्मी में नौकरी करते थे। जिससे प्रेरित होकर शुरू से ही उनके मन में हमेशा देश सेवा करने व देश के लिए बलिदान हो जाने की इच्छा थी। इसके लिए वह अवसर की तलाश कर रहा था। एक बार कोटा आर्मी केम्प में जवानों की भर्ती खुली और मोतीलाल ने परिचालक की नौकरी छोड़कर आर्मी में भर्ती हो गया। पहली बार जबलपुर आर्मी केंप में ट्रेनिंग के लिए गया। जिसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में देश की सेवा की और सैनिक से नायक तक प्रमोशन प्राप्त किया। मोतीलाल को शांति सेना यूनिट 12 ग्रेनेडियर्स श्रीलंका के लिए चुना गया। बटालियन के साथ श्रीलंका भेजा गया। यहां लिट्टे आतंकवादियों का बहादुरी से मुकाबला करते हुए 1 जून 1988 को गोली लगने से शहीद हो गए। मरनोपरांत उन्हें वीर चक्र से नवाजा जा चुका है।

एक सरकारी स्कूल चिन्हित कर उसका नाम शहीद मोतीलाल के नाम पर रखने व 1999 के पहले के शहीदों की प्रतिमा के लिए जमीन आवंटन करने के लिए राज्य सरकार की केबिनेट में फाईल भेजी गयी है। जैसे ही मंजूरी मिलती उक्त कार्यों को पूरा किया जाएगा। -प्रेमसिंह बाजौर, अध्यक्ष, सैनिक कल्याण बोर्ड

शहीद मोतीलाल मीणा से संबंधित फाईल विभाग में आ गई है। शीघ्र ही शहीद का नाम स्कूल पर अंकित किया जाएगा। खुशीराम रावत, माध्यमिक जिला शिक्षाधिकारी, टोंक

शहीद की प्रतिमा के लिए जमीन का प्रस्ताव अटल सेवा केंद्र के सामने का लिया गया है। प्रस्तावित आदेश उच्च अधिकारियों के पास भेजा जाएगा। -हीरालाल, सचिव, ग्राम पंचायत पोल्याडा

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