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जनप्रतिनिधियों के दावे खोखले साबित हुए, गहलोद घाट का रपटा दो साल बाद भी नहीं बना

3 वर्ष पहले
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पिछले दो साल पहले बीसलपुर बांध के गेट खोले जाने के कारण बह गए गहलोद घाट के रपटे अब तक नहीं बन पाया है। जबकि इसको बनाए जाने के लिए जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र का अवलोकन करने के साथ ही लोगों का आश्वस्त किया था कि गहलोद घाट का रपटा शीघ्र बनवाया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि गहलोद घाट पर बनास नदी में दो रपटे बने हुए थे। जिससे टोडारायसिंह, मालपुरा, पीपलू आदि के लोग टोंक आया जाया करते हैं। वहीं टोंक के लोग उक्त तीन तहसीलों में जाते थे। लेकिन दो वर्ष पूर्व बीसलपुर बांध ओवर फ्लो होने के कारण बनास नदी में बांध का पानी छोड़ना पड़ा।

पानी छोड़े जाने एवं क्षेत्र में भी भारी बारिश होने के कारण जो रपटा कई गांवों एवं तहसीलों के बीच सेतू का काम करता था। वो बह गया। जब पानी का बहाव कम हुआ तो उसको शीघ्र बनाए जाने पर जोर दिया गया। लेकिन रपटा सरकार द्वारा नहीं बनवाया गया।

बजरी के लीज धारक ने अपनी बजरी की आवाजाही के लिए वहां कच्चा रास्ता बनाया। वो भी दो तीन बार बह गया। लेकिन सरकार के जनप्रतिनिधियों ने तीन तहसील एवं जिला मुख्यालय को जाेड़ने वाले इस रपटे की सुध नहीं ली। जो अब कभी भी हादसे का कारण बन सकता है। रपटे पर बने कच्चें मार्ग पर गड्ढे होने के कारण कभी वहां से गुजरने वाले भारी वाहन हादसे का भी शिकार हो सकते हैं। रपटा नहीं बनने के कारण इसबार मानसून में लोगों की आवाजी फिर बंद हो सकती है। लेकिन सैंकड़ों लोगों के आने जाने के इस रास्ते पर भी ध्यान नहीं दिया गया। जो लोगों के बीच परेशाी का सबब बना हुआ है।

गौरतलब है कि रपटा नहीं बनने के कारण बारिश में फिर लोगों को 20 से 25 किलोमीटर की दूरी तय करके सोहेला की ओर से जाना पड़ेगा। इसको लेकर अब भी केवल आश्वासन ही दिए जा रहे हैं।

पदयात्रियों को आएगी परेशानी

डिग्गी कल्याणधणी की शौपुर सहित कई जिलों से आने वाले पैदल यात्री अक्सर यहीं से होकर जाते हैं। लेकिन रपटा टूटे होने तथा बारिश में वहां पर पानी भरे होने के कारण उनको भी खासी परेशानी आती रही है। हजारों पदयात्रियों को भी रपटा नहीं बनने तथा यात्रा के दौरान बारिश का पानी भरे होने के कारण उनको भी सोहेला होकर ही जाना पड़ रहा है।

49 करोड़ का भेज रखा है प्रपोजल

पीडब्ल्यूडी के एससी आरएस बैरवा का कहना है कि 49 करोड़ रुपए के प्रस्ताव बनाकर भेज रखे हैं, अभी तक राज्य सरकार ने इसकी स्वीकृति नहीं दी है। ऐसे में जैसे तैसे ही काम चलाना पड़ेगा।

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